विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प (उत्तरखंड) का उद्देश्य अत्यंत व्यापक और जीवन-मृत्यु दोनों को समेटने वाला है।
मृत्यु के रहस्य का उद्घाटन — प्रेतकल्प का प्रथम उद्देश्य है — मृत्यु के बाद आत्मा की वास्तविक यात्रा बताना। 'मरने के बाद मनुष्य की क्या गति होती है' — यह प्रश्न ही प्रेतकल्प का मूल है।
जीवन में धर्माचरण की प्रेरणा — नरक, यममार्ग और प्रेत-कष्टों का वर्णन इसलिए है कि जीते जी मनुष्य दान, सत्कर्म और भक्ति करे। गरुड़ पुराण में — 'इसी कारण भयभीत व्यक्ति अधिक दान-पुण्य करने की ओर प्रवृत्त होता है।'
परिजनों का कर्तव्य-बोध — प्रेतकल्प का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है परिजनों को उनके कर्तव्य की याद दिलाना — दशगात्र, षोडश श्राद्ध, सपिंडन। 'सत्पुत्र को चाहिए कि अंतकाल में सभी प्रकार का दान दिलाए।'
मुमूर्षु को ज्ञान देना — मृत्यु-शैया पर जाने वाले व्यक्ति के लिए गरुड़ पुराण-पाठ का प्रावधान इसीलिए है — वह जीव भी इसे सुनकर अपनी यात्रा को समझ सके।
आत्मज्ञान की ओर प्रेरणा — प्रेतकल्प का अंतिम उद्देश्य है — 'परमात्मा की शरण' का संदेश देना।





