विस्तृत उत्तर
सनातन शास्त्र बाह्य ब्रह्मांड में जो कुछ बताते हैं, उसे मानव शरीर रूपी सूक्ष्म ब्रह्मांड में भी स्थापित करते हैं। इसी सिद्धांत को 'यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे' कहा जाता है, अर्थात जो ब्रह्मांड में है वही शरीर में है। तपोलोक का वर्णन केवल बाहरी अंतरिक्ष के एक स्थान के रूप में नहीं, बल्कि मनुष्य की आंतरिक चेतना के एक चक्र और शारीरिक स्थान के रूप में भी किया गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार तपोलोक मनुष्य के ललाट पर स्थित है और योगशास्त्रों में यह भ्रूमध्य स्थित आज्ञा चक्र से संबंधित है।
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