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धनुष भंग प्रश्नोत्तरी — 9 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित धनुष भंग विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 9 प्रश्न

शिव अस्त्र-शस्त्र

पिनाक धनुष राम ने सीता स्वयंवर में कैसे तोड़ा

राजा जनक के स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से राम ने पिनाक धनुष सहज भाव से उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। इसी से सीता का विवाह राम से हुआ।

पिनाकसीता स्वयंवरराम
अस्त्र शस्त्र

पिनाक धनुष राम ने कैसे तोड़ा?

विश्वामित्र की आज्ञा पर राम शांत भाव से पिनाक के पास गए, उसे प्रणाम करके सहजता से उठाया, प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष खींचते ही वह भयंकर गर्जना के साथ दो टुकड़ों में टूट गया।

पिनाकरामधनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'कोदंड खण्डेउ राम तुलसी जयति बचन उचारहीं' — इसका अर्थ?

अर्थ — तुलसीदासजी कहते हैं — जब सबको निश्चय हुआ कि रामजी ने कोदण्ड (शिवजी का धनुष) तोड़ डाला, तब सब 'जयति' (जय हो) बोलने लगे। धनुष भंग के क्षण की जयकार।

बालकाण्डछन्द अर्थधनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी ने श्रीरामजी से धनुष तोड़ने के लिये क्या कहा?

'उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा' — उठो राम, शिवजी का धनुष तोड़ो, जनक का सन्ताप मिटाओ। गुरु की आज्ञा पर रामजी उठे और सहज भाव से धनुष तोड़ दिया।

बालकाण्डविश्वामित्र आज्ञाधनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने धनुष तोड़ने पर क्या कहा?

क्रोधित होकर पूछा — किसने शिवजी का धनुष तोड़ा? चेतावनी दी — जिसने तोड़ा उसे दण्ड मिलेगा। फरसा हाथ में लिये सभा में आये — सब डर गये। कहा — यह शिवजी का अपमान है।

बालकाण्डपरशुराम क्रोधधनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

धनुष भंग की ध्वनि सुनकर कौन क्रोधित होकर आये?

परशुरामजी (भार्गव/रेणुकासुत) — शिवजी के परम भक्त और विष्णु अवतार। उन्हें लगा कि शिवजी के धनुष का अपमान हुआ। क्रोधित होकर सभा में आये — 'किसने शिवजी का धनुष तोड़ा?' इसके बाद प्रसिद्ध परशुराम-लक्ष्मण संवाद।

बालकाण्डपरशुरामधनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

धनुष भंग के बाद सीताजी ने क्या किया?

सीताजी ने चकित होकर रामजी को देखा — नेत्र अपना खजाना पाकर स्थिर हो गये। सखियों ने सीताजी को रामजी के समीप ले जाकर जयमाला पहनवायी। गुरुजनों की लाज से सकुचाती थीं पर हृदय में आनन्द था।

बालकाण्डसीताजयमाला
रामचरितमानस — बालकाण्ड

धनुष टूटने पर आकाश से क्या हुआ?

देवताओं ने नगाड़े बजाये, अप्सराएँ गायीं, पुष्पवर्षा हुई। ब्रह्मा आदि ने प्रशंसा-आशीर्वाद दिये, किन्नरों ने रसीले गीत गाये। सीताजी के हाथ में जयमाला सुशोभित — सब राजा चकित होकर देखने लगे।

बालकाण्डधनुष भंगदेवता
रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीरामजी ने धनुष तोड़ने से पहले किसको प्रणाम किया?

गुरु विश्वामित्रजी के चरणकमलों को मन में प्रणाम किया, साथ ही गुरुजनों, माता-पिता और शिवजी को। फिर सहज भाव से धनुष उठाया। सर्वशक्तिमान होकर भी विनम्रता — मर्यादा पुरुषोत्तम का आदर्श।

बालकाण्डराम प्रणामगुरु

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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