विस्तृत उत्तर
परशुरामजी ने अत्यन्त क्रोधित होकर सभा में आकर पूछा कि किसने शिवजी का पवित्र धनुष तोड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जिसने भी यह किया उसे दण्ड मिलेगा।
बालकाण्ड में परशुरामजी के क्रोध का वर्णन है — वे फरसा (परशु) हाथ में लिये, भयंकर क्रोध में सभा में घुसे। सब राजा और लोग डर गये। लक्ष्मणजी ने परशुरामजी से वाद-विवाद किया जो बालकाण्ड का प्रसिद्ध प्रसंग है।
परशुरामजी ने कहा कि यह धनुष शिवजी का है — उसे तोड़ना शिवजी का अपमान है। उन्होंने पहले कई क्षत्रियों को मारा था और अब भी तैयार हैं।





