विस्तृत उत्तर
धनुष टूटने पर आकाश से देवताओं ने नगाड़े बजाये, अप्सराएँ गाने लगीं और पुष्पवर्षा हुई। ब्रह्मा आदि देवता, सिद्ध और मुनीश्वर प्रभु की प्रशंसा और आशीर्वाद देने लगे।
चौपाई — 'हरषि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई। बरषि प्रसून अपछरा गाई। पानि सरोज सोह जयमाला। अवचट चितए सकल भुआला॥'
अर्थ — देवताओंने हर्षित होकर नगाड़े बजाये और पुष्प बरसाकर अप्सराएँ गाने लगीं। सीताजीके करकमलोंमें जयमाला सुशोभित है। सब राजा चकित होकर अचानक उनकी ओर देखने लगे।
आगे — 'ब्रह्मादिक सुर सिद्ध मुनीसा। प्रभुहि प्रसंसहिं देहिं असीसा। बरिसहिं सुमन रंग बहु माला। गावहिं किंनर गीत रसाला' — ब्रह्मा आदि देवता, सिद्ध और मुनि प्रभु की प्रशंसा और आशीर्वाद दे रहे हैं, रंग-बिरंगे फूल और मालाएँ बरसा रहे हैं, किन्नरलोग रसीले गीत गा रहे हैं।





