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पितृ कर्म प्रश्नोत्तरी — 22 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पितृ कर्म विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 22 प्रश्न

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त्रयोदशी श्राद्ध में प्राचीनावीती क्या है?

पितृ कर्म में दायें कंधे वाला जनेऊ।

प्राचीनावीतीजनेऊपितृ कर्म
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एकादशी श्राद्ध में अपराह्न काल क्यों?

यह पितृ कर्म का मुख्य काल है।

अपराह्नश्राद्ध समयपितृ कर्म
लोक

दशमी श्राद्ध में अपसव्य क्या है?

पितृ कर्म वाला जनेऊ धारण।

अपसव्यजनेऊपितृ कर्म
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नवमी श्राद्ध में जनेऊ कैसे रखें?

जनेऊ दाहिने कंधे पर रखें।

जनेऊअपसव्यपितृ कर्म
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प्राचीनावीती क्या होता है?

पितृ कर्म में दाहिने कंधे वाला जनेऊ।

प्राचीनावीतीजनेऊपितृ कर्म
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श्राद्ध का अर्थ क्या है?

श्रद्धा से पितरों के लिए किया गया अर्पण श्राद्ध है।

श्राद्ध अर्थश्रद्धापितृ कर्म
लोक

श्राद्ध का अर्थ क्या है?

श्रद्धा और विधि से पितरों को अर्पित कर्म श्राद्ध है।

श्राद्ध अर्थश्रद्धापितृ कर्म
लोक

अपराह्न में श्राद्ध क्यों करें?

अपराह्न में सूर्य की ऊर्जा पितरों तक पहुँचती मानी गई है।

अपराह्न श्राद्धसूर्य ऊर्जापितृ कर्म
लोक

श्राद्ध का अर्थ क्या है?

श्रद्धा से पितरों के लिए किया गया शास्त्रोक्त दान श्राद्ध है।

श्राद्ध अर्थश्रद्धापितृ कर्म
लोक

श्राद्ध में क्या नहीं खाना चाहिए?

श्राद्ध में प्याज-लहसुन, मसूर, बैंगन, मांस और मद्य वर्जित हैं।

श्राद्ध वर्ज्यनिषिद्ध भोजनपितृ कर्म
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पंचबलि क्या है?

पाँच जीव/शक्तियों के लिए अन्न अर्पण पंचबलि है।

पंचबलिश्राद्धपितृ कर्म
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पिण्डदान का पूर्वजों से क्या संबंध है?

पिण्डदान पूर्वजों से मिले शरीर और वंशगत तत्वों की तृप्ति से जुड़ा है।

पिण्डदानपूर्वजDNA
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श्राद्ध में विश्वेदेव क्यों बुलाते हैं?

विश्वेदेव श्राद्ध अन्न और कर्म की रक्षा के लिए बुलाए जाते हैं।

विश्वेदेव आवाहनश्राद्ध रक्षापितृ कर्म
लोक

तृतीया श्राद्ध का संकल्प कैसे लें?

तिथि, गोत्र और पितृ नाम स्मरण करके संकल्प लिया जाता है।

श्राद्ध संकल्पतृतीया श्राद्धपितृ कर्म
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तृतीया श्राद्ध कौन करे?

जिसके पितर तृतीया तिथि को दिवंगत हुए हों, वह तृतीया श्राद्ध करे।

तृतीया श्राद्ध कौन करेवंशजपितृ कर्म
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श्राद्ध का अर्थ क्या है?

श्रद्धा और विधि से पितरों के लिए किया गया दान श्राद्ध है।

श्राद्ध अर्थब्रह्म पुराणपितृ कर्म
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नित्य श्राद्ध और नैमित्तिक श्राद्ध में क्या अंतर है?

नित्य श्राद्ध प्रतिदिन का है, जबकि नैमित्तिक श्राद्ध वार्षिक तिथि या विशेष निमित्त से किया जाता है।

नित्य श्राद्धनैमित्तिक श्राद्धश्राद्ध प्रकार
लोक

पूर्वाह्न में श्राद्ध क्यों वर्जित माना गया है?

श्राद्ध के लिए कुतप वेला निर्धारित है, इसलिए पूर्वाह्न में श्राद्ध वर्जित माना गया है।

पूर्वाह्न श्राद्धश्राद्ध समयकुतप वेला
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कुतप वेला में श्राद्ध क्यों करना चाहिए?

कुतप वेला पितृकर्म के लिए शास्त्रोक्त मध्याह्न समय है, इसलिए श्राद्ध इसी समय करना चाहिए।

कुतप वेलाश्राद्ध समयपितृ कर्म
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तर्पण में कुश का उपयोग क्यों किया जाता है?

कुश पवित्र ऊर्जा का सुचालक है और पितरों का वास उसके मूल भाग में माना गया है।

कुशतर्पणश्राद्ध द्रव्य
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श्राद्ध और तर्पण में क्या अंतर है?

तर्पण जल-तिल से पितरों की तृप्ति है, जबकि श्राद्ध में पिण्डदान, ब्राह्मण भोजन, पंचबलि और तर्पण सहित पूर्ण पितृ-कर्म होता है।

श्राद्धतर्पणपितृ कर्म
मंदिर संस्कार

मंदिर में पिंडदान करने का क्या विधान है?

पिंडदान: सामान्य मंदिर = अनुशंसित नहीं। विशिष्ट तीर्थ: गया विष्णुपद (सर्वोच्च), प्रयाग, काशी, रामेश्वरम। पिंड: चावल/जौ+तिल+शहद+घी। विधि: तर्पण (दक्षिण मुख) → पिंड कुश पर → मंत्र → ब्राह्मण भोजन। कब: पितृपक्ष, मृत्यु तिथि, अमावस्या। कौन: ज्येष्ठ पुत्र प्राथमिक।

पिंडदानश्राद्धपितृ कर्म

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।