ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

ब्राह्मण भोजन प्रश्नोत्तरी — 21 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित ब्राह्मण भोजन विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 21 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में बारह ब्राह्मणों को भोजन क्यों कराएं?

समापन पर बारह ब्राह्मणों को खीर, मधु आदि उत्तम पदार्थ खिलाकर व्रत की पूर्ति और दान का विधान बताया गया है।

ब्राह्मण भोजनबारह ब्राह्मणव्रतपूर्ति
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध में ब्राह्मण भोजन कैसे कराएं?

सात्त्विक भोजन श्रद्धा से कराएं।

ब्राह्मण भोजनसात्त्विक भोजनश्राद्ध
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध में अपराह्न काल क्यों जरूरी है?

यह श्राद्ध का मुख्य समय है।

अपराह्नपिण्डदानब्राह्मण भोजन
लोक

एकादशी श्राद्ध में ब्राह्मण को क्या खिलाएं?

फलाहार या सीधा दान।

ब्राह्मण भोजनफलाहारएकादशी
लोक

दशमी श्राद्ध में ब्राह्मण भोजन के समय मौन क्यों?

श्रद्धा और पितृ भावना बनाए रखने के लिए।

मौनब्राह्मण भोजनश्रद्धा
लोक

दशमी श्राद्ध में खीर पूड़ी क्यों शुभ है?

घी-दूध वाला अन्न पितरों को तृप्त करता है।

खीर पूड़ीब्राह्मण भोजनपितृ तृप्ति
लोक

दशमी श्राद्ध में कितने ब्राह्मण भोजन कराएं?

दस या 1, 3, 5, 9 ब्राह्मण।

ब्राह्मण भोजनदशमी श्राद्धविषम संख्या
लोक

दशमी श्राद्ध में अपराह्न काल क्यों जरूरी है?

यह पितृ कर्म का मुख्य समय है।

अपराह्नब्राह्मण भोजनदशमी श्राद्ध
लोक

ब्राह्मण भोजन क्यों जरूरी है?

ब्राह्मण भोजन श्राद्ध का मुख्य अंग है।

ब्राह्मण भोजनश्राद्धधर्मसिन्धु
पौराणिक कथा

महर्षि निमि ने पुत्र की मृत्यु पर क्या किया?

महर्षि निमि ने अशांत मन से श्रेष्ठ ब्राह्मणों को अपने आश्रम में आमंत्रित कर वे सभी सात्त्विक और स्वादिष्ट व्यंजन परोसे जो उनके मृत पुत्र को अत्यंत प्रिय थे। पितृ देवताओं ने प्रकट होकर बताया कि यह भोजन साक्षात् पितृ यज्ञ के रूप में उन्हें प्राप्त हुआ है। इसी कार्य से श्राद्ध की लौकिक परम्परा का आरंभ हुआ।

निमि कार्यब्राह्मण भोजनपुत्र प्रिय व्यंजन
ब्राह्मण भोजन

देव कार्य के लिए कितने ब्राह्मण होने चाहिए?

श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार श्राद्ध में देव कार्य के लिए दो ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान है। दो युग्म अर्थात् सम संख्या है, जबकि पितृ कार्य के लिए विषम संख्या एक, तीन, पाँच होती है। ब्राह्मण भगवान के भक्त, ज्ञाननिष्ठ और योगी होने चाहिए।

देव कार्यदो ब्राह्मणश्रीमद्भागवत
ब्राह्मण भोजन

श्राद्ध में कितने ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए?

श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार श्राद्ध में देव कार्य के लिए दो और पितृ कार्य के लिए तीन या अयुग्म विषम संख्या जैसे एक, तीन, पाँच ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान है। ब्राह्मणों को आदरपूर्वक बैठाकर, पूर्वजों की उपस्थिति की भावना से भोजन कराकर, दक्षिणा और वस्त्र देकर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

ब्राह्मण भोजनदेव कार्यपितृ कार्य
श्राद्ध मुहूर्त

अपराह्न काल का समय क्या है?

अपराह्न काल अपराह्न 01:34 से अपराह्न 04:04 तक का विशेष समय है, जो लगभग 2 घंटे 30 मिनट का होता है। यदि पूर्व मुहूर्तों में कार्य पूर्ण न हो, तो इस काल तक ब्राह्मण भोजन और विसर्जन संपन्न कर लेना चाहिए। यह तीन मुहूर्तों में सबसे लंबा और अंतिम है।

अपराह्न कालश्राद्ध समयब्राह्मण भोजन
लोक

विद्वान ब्राह्मण को भोजन कराने से 7 पीढ़ियों को तृप्ति कैसे मिलती है?

सुपात्र ब्राह्मण को श्राद्ध भोजन कराने से मंत्र और श्रद्धा के प्रभाव से सात पीढ़ियों तक पितृ तृप्ति मानी गई है।

ब्राह्मण भोजन7 पीढ़ी तृप्तिश्राद्ध
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

ब्राह्मणों को खिलाया गया अन्न पितरों तक कैसे पहुँचता है?

ब्राह्मणों द्वारा उच्चारित नाम-गोत्र और मंत्र श्राद्ध अन्न को पितरों तक पहुँचाते हैं।

ब्राह्मण भोजनश्राद्ध अन्नपितर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूतक काल में ब्राह्मण भोजन क्यों वर्जित है?

ब्राह्मण भोजन सूतक में वर्जित है क्योंकि यह अवधि प्रेतकर्म और सद्गति पर केंद्रित होती है।

सूतक कालब्राह्मण भोजनवर्जित
पुरश्चरण

ब्राह्मण भोजन का महत्व क्या है?

ब्राह्मण भोजन पुरश्चरण का पाँचवाँ अंग है — अनुष्ठान के अंत में 13 सात्विक विद्वान ब्राह्मणों को भोजन कराना। यह समाज और ब्रह्मांडीय शक्तियों के प्रति कृतज्ञता और ऋण चुकाने का कृत्य है।

ब्राह्मण भोजन13 ब्राह्मणकृतज्ञता
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कपटमुनि ने प्रतापभानु से क्या छलकपट किया?

कपटमुनि ने कहा — मैं रसोई बनाऊँ, तुम परोसो, जो खायगा वह तुम्हारा दास बनेगा। राजा ने एक लाख ब्राह्मणों को बुलवाया। कपटमुनि ने भोजन में माँस मिला दिया। परोसते समय आकाशवाणी हुई — 'यह अन्न मत खाओ, इसमें माँस है!' ब्राह्मण क्रोधित हुए।

बालकाण्डकपटमुनिछल
उद्यापन और दान

मासिक शिवरात्रि व्रत का उद्यापन कैसे करें?

उद्यापन में 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र से हवन करें और 12 या 14 ब्राह्मणों को भोजन व दान देकर विदा करें।

उद्यापन विधिब्राह्मण भोजनहवन
उद्यापन और दान

बुधवार व्रत में क्या दान करें?

व्रत के उद्यापन में हरे वस्त्र, कांसे का बर्तन, साबुत मूंग की दाल, फल, हरी चूड़ियां और 21 मोदक दान करने चाहिए। साथ ही ब्राह्मणों को बिना नमक का सात्विक भोजन कराना चाहिए।

दान सामग्रीहरी वस्तुएंब्राह्मण भोजन
अंतिम संस्कार

तेरहवीं पर ब्राह्मण भोजन का नियम?

तेरहवीं = पितर विदाई। ब्राह्मण भोजन अनिवार्य (विषम संख्या — 1/3/5/7/11)। सात्विक भोजन, लोहे बर्तन नहीं, पंचबलि, दक्षिणा। सामूहिक भोज + मृतक वस्तुएँ दान + गरुड़ पुराण समाप्ति।

तेरहवींब्राह्मण भोजनमृत्युभोज

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।