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याज्ञवल्क्य स्मृति प्रश्नोत्तरी — 19 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित याज्ञवल्क्य स्मृति विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 19 प्रश्न

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याज्ञवल्क्य स्मृति में श्राद्ध फल क्या है?

आयु, सन्तति, धन, विद्या और अभीष्ट फल।

याज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्ध फलआयु धन
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दशमी श्राद्ध का शास्त्रीय आधार क्या है?

पुराणों और स्मृतियों में इसका आधार है।

गरुड़ पुराणविष्णु पुराणयाज्ञवल्क्य स्मृति
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याज्ञवल्क्य स्मृति में श्राद्ध का फल क्या है?

आयु, धन, संतान, विद्या, स्वर्ग और मोक्ष।

याज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्ध फलआयु
लोक

नवमी श्राद्ध से संतान सुख मिलता है क्या?

हाँ, संतान का आशीर्वाद बताया गया है।

संतान सुखयाज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्ध फल
लोक

नवमी श्राद्ध में मातृ वसु क्या है?

माता को वसु स्वरूप मानना।

मातृ वसुयाज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्ध
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अष्टमी श्राद्ध का शास्त्रीय आधार क्या है?

पुराण, स्मृति और गृह्यसूत्र इसका आधार हैं।

शास्त्रीय आधारगरुड़ पुराणयाज्ञवल्क्य स्मृति
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सप्तमी श्राद्ध का फल क्या है?

सप्तमी श्राद्ध आयु, धन, संतान, राज्य, स्वर्ग और मोक्ष देता है।

सप्तमी श्राद्ध फलयाज्ञवल्क्य स्मृतिनारद संहिता
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ब्राह्मण भोज क्यों जरूरी है?

ब्राह्मण भोज से पितरों की तृप्ति मानी गई है।

ब्राह्मण भोजश्राद्धयाज्ञवल्क्य स्मृति
लोक

याज्ञवल्क्य स्मृति में श्राद्ध फल क्या है?

श्राद्ध से आयु, संतान, धन, विद्या, स्वर्ग, मोक्ष और सुख मिलते हैं।

याज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्ध फलआयु धन मोक्ष
लोक

तृतीया श्राद्ध से आयु बढ़ती है?

श्राद्ध से पितरों द्वारा आयु और बल का आशीर्वाद मिलता है।

आयुश्राद्ध फलयाज्ञवल्क्य स्मृति
लोक

तृतीया श्राद्ध से धन मिलता है?

श्राद्ध से धन और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

धन लाभतृतीया श्राद्धयाज्ञवल्क्य स्मृति
श्राद्ध फल

श्राद्ध करने से कौन से 8 फल मिलते हैं?

याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार श्राद्ध से तृप्त और प्रसन्न पितर मनुष्यों को आठ अमूल्य संपदाएं प्रदान करते हैं। ये हैं आयु दीर्घ आयु, प्रजा सुयोग्य संतान, धन प्रचुर संपत्ति, विद्या श्रेष्ठ ज्ञान, स्वर्ग मरणोपरांत स्वर्ग, मोक्ष अंतिम मुक्ति, सुख लौकिक सुख, और राज्य राज्य-सत्ता।

आठ फलयाज्ञवल्क्य स्मृतिआयु संतान धन
स्मृति शास्त्र

याज्ञवल्क्य के अनुसार श्राद्धकर्ता कैसा होना चाहिए?

याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार श्राद्धकर्ता को पवित्र आचरण वाला, पत्नी के प्रति निष्ठावान और क्रोध-रहित होना चाहिए। श्राद्ध के दिन क्रोध, मार्ग गमन, या अनुचित आचरण से पितर निराश होकर लौट जाते हैं। श्राद्ध की सफलता कर्ता के आंतरिक गुणों पर निर्भर करती है।

याज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्धकर्ता गुणपवित्र आचरण
मातामह श्राद्ध

क्या पौत्र और दौहित्र दोनों समान हैं?

हाँ, याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार पौत्र (पुत्र का पुत्र = पोता) और दौहित्र (पुत्री का पुत्र = नाती) दोनों समान रूप से अपने पूर्वजों को नरक से तारने की क्षमता रखते हैं। दौहित्र का श्राद्ध पौत्र के श्राद्ध से किसी भी प्रकार कम नहीं।

पौत्र दौहित्र समानयाज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्ध शक्ति
श्राद्ध परिचय

मिताक्षरा के अनुसार श्राद्ध क्या है?

मिताक्षरा (याज्ञवल्क्य स्मृति की टीका) = 'पितरों का उद्देश्य करके उनके कल्याण एवं पारलौकिक तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किसी पवित्र वस्तु/द्रव्य का परित्याग = श्राद्ध।' मूल भाव = पवित्र द्रव्य का त्याग।

मिताक्षरायाज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्ध परिभाषा
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मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति में 7 पीढ़ी का क्या प्रमाण है?

मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति पितृकुल में सात और मातृकुल में पाँच पीढ़ी तक सपिण्डता बताती हैं।

मनुस्मृतियाज्ञवल्क्य स्मृति7 पीढ़ी
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पितृकुल में 7 पीढ़ी तक सपिण्डता क्यों मानी जाती है?

पितृकुल में सात पीढ़ियों तक एक ही पिण्ड और वंश संबंध का प्रभाव माना गया है।

पितृकुल7 पीढ़ीसपिण्डता
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याज्ञवल्क्य स्मृति में श्राद्ध देवता कौन बताए गए हैं?

याज्ञवल्क्य स्मृति में वसु, रुद्र और आदित्य को श्राद्ध देवता बताया गया है।

याज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्ध देवतावसु
लोक

पितरों को वसु, रुद्र और आदित्य रूप क्यों माना गया है?

शास्त्रों में पिता को वसु, दादा को रुद्र और परदादा को आदित्य कहा गया है, इसलिए पितर देवस्वरूप माने जाते हैं।

वसु रुद्र आदित्यपितृश्राद्ध

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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