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श्राद्ध विधि प्रश्नोत्तरी — 23 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्राद्ध विधि विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 23 प्रश्न

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त्रयोदशी श्राद्ध में पंचबलि क्या है?

पांच अंशों को अन्न अर्पण।

पंचबलिश्राद्ध विधित्रयोदशी
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त्रयोदशी श्राद्ध में जनेऊ कैसे रखें?

जनेऊ दायें कंधे पर रखें।

जनेऊप्राचीनावीतीश्राद्ध विधि
लोक

एकादशी श्राद्ध में पंचबलि क्या है?

पांच जीव/देव अंशों को अर्पण।

पंचबलिएकादशी श्राद्धश्राद्ध विधि
लोक

एकादशी श्राद्ध में दक्षिण दिशा क्यों?

दक्षिण दिशा पितरों की दिशा है।

दक्षिण दिशापितरश्राद्ध विधि
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एकादशी श्राद्ध में कुशा क्यों जरूरी है?

कुशा श्राद्ध को पवित्र करती है।

कुशापवित्रीश्राद्ध विधि
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दशमी श्राद्ध में जनेऊ कैसे रखें?

जनेऊ दाएँ कंधे पर रखें।

जनेऊअपसव्यश्राद्ध विधि
लोक

नवमी श्राद्ध में ब्राह्मण भोज क्यों जरूरी है?

यह श्राद्ध का मुख्य अंग है।

ब्राह्मण भोजनवमी श्राद्धश्राद्ध विधि
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नवमी श्राद्ध में पिण्ड कैसे बनाते हैं?

चावल, दूध, घी, शक्कर और मधु से।

पिण्डचावलश्राद्ध विधि
लोक

नवमी श्राद्ध में श्राद्धकर्ता कैसे बैठे?

कुशा, रेशम या ऊन के आसन पर।

श्राद्ध विधिआसननवमी
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अष्टमी श्राद्ध में कौन से देव पहले पूजे जाते हैं?

विष्णु स्मरण और काम-काल विश्वेदेव।

विष्णुविश्वेदेवश्राद्ध विधि
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अष्टमी श्राद्ध में पंचबलि क्या है?

पांच जीव/देव अंशों को अन्न देना।

पंचबलिश्राद्ध विधिपितृ पक्ष
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अष्टमी श्राद्ध में पिण्ड कैसे बनाते हैं?

चावल, जौ, दूध, घी, शक्कर और मधु से।

पिण्डदानपिण्डश्राद्ध विधि
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अष्टमी श्राद्ध में जनेऊ कैसे रखते हैं?

जनेऊ दाहिने कंधे पर रखें।

जनेऊप्राचीनावीतीश्राद्ध विधि
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अष्टमी श्राद्ध में कौन सा मुख रखना चाहिए?

दक्षिण दिशा की ओर मुख रखें।

दक्षिण दिशातर्पणश्राद्ध विधि
लोक

सप्तमी श्राद्ध कैसे करें?

स्नान, संकल्प, पिण्डदान, तर्पण, पंचबलि और ब्राह्मण भोजन से सप्तमी श्राद्ध करें।

सप्तमी श्राद्ध कैसे करेंश्राद्ध विधिपितृ तर्पण
लोक

श्राद्ध में सफेद वस्त्र क्यों पहनें?

सफेद वस्त्र श्राद्ध की शुद्धता और सात्विकता के लिए धारण किए जाते हैं।

सफेद वस्त्रश्राद्ध विधिशुद्धता
लोक

दक्षिण मुख होकर श्राद्ध क्यों करें?

पितृ कर्म के लिए दक्षिण दिशा को मुख्य माना गया है।

दक्षिण मुखश्राद्ध विधिपितृ दिशा
लोक

तृतीया श्राद्ध कैसे करें?

संकल्प, तर्पण, पिण्डदान, पंचबलि और ब्राह्मण भोजन से तृतीया श्राद्ध करें।

तृतीया श्राद्ध कैसे करेंश्राद्ध विधिपितृ तर्पण
श्राद्ध विधि

यज्ञोपवीत (जनेऊ) श्राद्ध में कैसे पहनें?

श्राद्ध में जनेऊ अपसव्य अवस्था में पहना जाता है, अर्थात् दाएं कंधे पर और बाएं हाथ के नीचे। यह देव कार्य के सव्य बाएं कंधे पर से भिन्न है। शास्त्रों ने इसे अत्यंत महत्त्वपूर्ण कहा है। पितरों का तर्पण इसी अवस्था में किया जाता है।

जनेऊअपसव्ययज्ञोपवीत
लोक

पितृ तीर्थ किसे कहते हैं?

अंगूठे और तर्जनी के बीच का भाग पितृ तीर्थ कहलाता है।

पितृ तीर्थतर्पण जलअंजलि
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पितृ कार्य में अपसव्य मुद्रा क्यों रखी जाती है?

पितृ कार्य में जनेऊ दाएँ कंधे पर रखी जाती है, जिसे अपसव्य मुद्रा कहा जाता है।

अपसव्यजनेऊपितृ कार्य
लोक

पितृ तर्पण दक्षिण दिशा की ओर मुख करके क्यों किया जाता है?

पितरों और यमराज का संबंध दक्षिण दिशा से माना गया है, इसलिए पितृ तर्पण दक्षिणाभिमुख होता है।

दक्षिण दिशापितृ तर्पणयमराज
श्राद्ध एवं पितृकर्म

श्राद्ध में अर्घ्य देने की विधि क्या है?

श्राद्ध में अर्घ्य (तर्पण) की विधि में दक्षिण मुख, अपसव्य स्थिति में, तांबे-चाँदी के पात्र में जल-तिल-कुश मिलाकर पितरों का नाम-गोत्र लेते हुए जल छोड़ा जाता है। अपराह्न का समय श्रेष्ठ माना गया है।

अर्घ्यश्राद्ध विधितर्पण

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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