शिव-सती-पार्वती कथावीरभद्र कौन है और उसकी उत्पत्ति कैसे हुईवीरभद्र शिव के पहले उग्र रुद्रावतार और गण हैं। सती के आत्मदाह के समाचार पर क्रोधित शिव ने जटा उखाड़कर पर्वत पर फेंकी — उससे आठ भुजाओं वाले विकराल वीरभद्र प्रकट हुए।#वीरभद्र#शिव अवतार#जटा
शिव पुराण परिचयरुद्र संहिता में कौन-कौन से खंड हैंरुद्र संहिता में 5 खंड हैं — 1. सृष्टि खंड (शिव-महात्म्य) 2. सती खंड (सती विवाह, दक्ष-यज्ञ) 3. पार्वती खंड (पार्वती तपस्या, शिव-विवाह) 4. कुमार खंड (कार्तिकेय जन्म) 5. युद्ध खंड (शंखचूड़ आदि वध)।#रुद्र संहिता#शिव पुराण#सती
शिव पार्वती विवाहशिव की बारात में कौन-कौन थे?शिव की बारात में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र, सप्तर्षि, देवता, गंधर्व, यक्ष, नाग, किन्नर, गण, भूत-प्रेत, पिशाच, योगिनियाँ और समस्त जीव-जंतु शामिल थे। यह अब तक की सबसे विचित्र और अद्भुत बारात थी।#शिव बारात#शिव पार्वती विवाह#गण
नाम और स्वरूपमाँ शैलपुत्री कौन हैं और उनके नाम का क्या अर्थ है?शैलपुत्री = 'शैल (पर्वत) की पुत्री।' जन्म = पर्वतराज हिमालय के घर। सती का पुनर्जन्म — दक्ष यज्ञ में आत्माहुति → हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में पुनर्जन्म। नवदुर्गा की प्रथम स्वरूपा। नवरात्रि के प्रथम दिन पूजा।#माँ शैलपुत्री#प्रथम दुर्गा#नाम अर्थ
माँ पार्वती परिचय और व्युत्पत्तिमाँ पार्वती कौन हैं?माँ पार्वती शक्ति का सर्वोच्च स्वरूप हैं। शिव विशुद्ध चेतना हैं तो पार्वती उस चेतना को स्पंदित करने वाली मूल प्रकृति और ऊर्जा हैं। वे परब्रह्म की 'इच्छा शक्ति', 'ज्ञान शक्ति' और 'क्रिया शक्ति' हैं।#माँ पार्वती#शक्ति तत्त्व#मूल प्रकृति
रत्न, ग्रह और अधिष्ठात्री देवीमोती की अधिष्ठात्री देवी कौन हैं?मोती (चंद्र ग्रह) की अधिष्ठात्री देवी भगवती गौरी (पार्वती) हैं — वे चंद्रमा की सौम्य, शीतल और पोषण प्रदान करने वाली शक्ति का मातृ-स्वरूप हैं।#मोती अधिष्ठात्री#भगवती गौरी#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डबालकाण्ड में सबसे पहले कौन सी कथा आती है — शिव-सती या पार्वती जन्म?शिव-सती कथा पहले — पार्वती जन्म बाद में। क्रम: मंगलाचरण → नाम महिमा → याज्ञवल्क्य-भरद्वाज → शिव-सती → दक्ष यज्ञ → सती देहत्याग → पार्वती जन्म → तपस्या → शिव-पार्वती विवाह → रामावतार कारण → राम जन्म।#बालकाण्ड#कथा क्रम#शिव सती
रामचरितमानस — बालकाण्ड'गिरिजा' कौन हैं?पार्वतीजी — गिरि (पर्वत/हिमवान) की पुत्री। 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए।' अन्य नाम — उमा, भवानी, अम्बिका, गौरी, शैलकुमारी, अपर्णा।#बालकाण्ड#गिरिजा#पार्वती
गृह आचार एवं पूजा विधिभोजन के पहले और बाद में कौन से मंत्र बोलने चाहिए?भोजन से पहले 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे' और 'ब्रह्मार्पणम्' श्लोक बोलें। भोजन के बाद पाचन हेतु 'अगस्त्यं कुम्भकर्णं च' मंत्र बोलें। भोजन से पहले हाथ-पाँव-मुँह धोना जरूरी है।#भोजन मंत्र#अन्नपूर्णा#ब्रह्मार्पणम
शिवशीघ्र विवाह के लिए भगवान शिव का कौन सा मंत्र जपना चाहिएविवाह हेतु 'ॐ साम्ब सदाशिवाय नमः' मंत्र और सोमवार के दिन शिव-पार्वती की विधिवत पूजा फलदायी होती है।#विवाह#शिव मंत्र#पार्वती
दैनिक आचारखाना बनाते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' या 'ॐ अन्नपूर्णायै नमः'। शांत मन, स्वच्छ, सकारात्मक भाव से बनाएं। क्रोध/नकारात्मकता में न बनाएं — भोजन भाव ग्रहण करता है।#खाना बनाना#रसोई#मंत्र
नित्य मंत्रभोजन के बाद कौन सा मंत्र बोलें?भोजन पूर्व: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः...' (गीता 4.24) + पंचप्राण आहुति। भोजन बाद: 'अन्नदाता सुखी भव' + 'ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा' (जल सहित) + आचमन। पूर्व/उत्तर मुख, मौन भोजन श्रेष्ठ।#भोजन मंत्र#अन्नपूर्णा#भोजनोत्तर
दैनिक कर्मभोजन से पहले कौन सा मंत्र बोलना चाहिएभोजन से पहले: (1) गीता 4.24: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्' (2) उपनिषद: 'ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु' (3) 'अन्नब्रह्मा रसो विष्णुः भोक्ता देवो महेश्वरः' (4) अन्नपूर्णा स्तोत्र। पूर्व/उत्तर दिशा में मुख कर भूमि पर बैठकर भोजन करें।#भोजन मंत्र#ब्रह्मार्पणम्#अन्नपूर्णा