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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 1

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ॥ पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें॥

Bahuri bandi khal gan satibhaen. Je binu kaaj dahinehu baen. Par hit hani labh jinh keren. Ujaren harash bishad baseren.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अब मैं सच्चे भावसे दुष्टोंको प्रणाम करता हूँ, जो बिना ही प्रयोजन, अपना हित करनेवालेके भी प्रतिकूल आचरण करते हैं। दूसरोंके हितकी हानि ही जिनकी दृष्टिमें लाभ है, जिनको दूसरोंके उजड़नेमें हर्ष और बसनेमें विषाद होता है॥ १ ॥

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

संत वंदना के बाद तुलसीदास जी सच्चे भाव से दुष्टों (खल) की वंदना करते हैं। दुष्टों का स्वभाव होता है कि वे बिना कारण ही भलाई करने वालों के भी विरुद्ध रहते हैं। उन्हें दूसरों की हानि में अपना लाभ दिखता है, और दूसरों के उजड़ने में खुशी व बसने में दुःख होता है।

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 1 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik