वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ॥ पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें॥
Bahuri bandi khal gan satibhaen. Je binu kaaj dahinehu baen. Par hit hani labh jinh keren. Ujaren harash bishad baseren.
अब मैं सच्चे भावसे दुष्टोंको प्रणाम करता हूँ, जो बिना ही प्रयोजन, अपना हित करनेवालेके भी प्रतिकूल आचरण करते हैं। दूसरोंके हितकी हानि ही जिनकी दृष्टिमें लाभ है, जिनको दूसरोंके उजड़नेमें हर्ष और बसनेमें विषाद होता है॥ १ ॥
संत वंदना के बाद तुलसीदास जी सच्चे भाव से दुष्टों (खल) की वंदना करते हैं। दुष्टों का स्वभाव होता है कि वे बिना कारण ही भलाई करने वालों के भी विरुद्ध रहते हैं। उन्हें दूसरों की हानि में अपना लाभ दिखता है, और दूसरों के उजड़ने में खुशी व बसने में दुःख होता है।
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