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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड सोरठा 3

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु। बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु॥ ३ (ख)॥

Sant saral chit jagat hit jani subhau sanehu. Balabinay suni kari kripa ram charan rati dehu.

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

संत सरलहृदय और जगत्‌के हितकारी होते हैं, उनके ऐसे स्वभाव और स्नेहको जानकर मैं विनय करता हूँ, मेरी इस बाल-विनयको सुनकर कृपा करके श्रीरामजीके चरणोंमें मुझे प्रीति दें॥ ३ (ख)॥

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

संतों को सरल हृदय और संसार का हितकारी जानकर तुलसीदास जी उनसे बाल-विनय (बच्चों जैसी प्रार्थना) कर रहे हैं कि वे कृपा करके उन्हें श्रीराम के चरणों में प्रीति (भक्ति) प्रदान करें।

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