वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु। बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु॥ ३ (ख)॥
Sant saral chit jagat hit jani subhau sanehu. Balabinay suni kari kripa ram charan rati dehu.
संत सरलहृदय और जगत्के हितकारी होते हैं, उनके ऐसे स्वभाव और स्नेहको जानकर मैं विनय करता हूँ, मेरी इस बाल-विनयको सुनकर कृपा करके श्रीरामजीके चरणोंमें मुझे प्रीति दें॥ ३ (ख)॥
संतों को सरल हृदय और संसार का हितकारी जानकर तुलसीदास जी उनसे बाल-विनय (बच्चों जैसी प्रार्थना) कर रहे हैं कि वे कृपा करके उन्हें श्रीराम के चरणों में प्रीति (भक्ति) प्रदान करें।
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