ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 2

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

हरि हर जस राकेस राहु से। पर अकाज भट सहसबाहु से॥ जे पर दोष लखहिं सहसाखी। पर हित घृत जिन्ह के मन माखी॥

Hari har jas rakes rahu se. Par akaj bhat sahasabahu se. Je par dosh lakhahin sahasakhi. Par hit ghrit jinh ke man makhi.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो हरि और हरके यशरूपी पूर्णिमाके चन्द्रमाके लिये राहुके समान हैं(अर्थात् जहाँ कहीं भगवान् विष्णु या शङ्करके यशका वर्णन होता है, उसीमें वे बाधा देते हैं) और दूसरोंकी बुराई करनेमें सहस्रबाहुके समान वीर हैं। जो दूसरोंके दोषोंको हजार आँखोंसे देखते हैं और दूसरोंके हितरूपी घीके लिये जिनका मन मक्खीके समान है(अर्थात् जिस प्रकार मक्खी घीमें गिरकर उसे खराब कर देती है और स्वयं भी मर जाती है, उसी प्रकार दुष्ट लोग दूसरोंके बने-बनाये कामको अपनी हानि करके भी बिगाड़ देते हैं)॥ २ ॥

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

दुष्टों की तुलना राहु से की गई है जो हरि-हर के यश रूपी चंद्रमा को ग्रस लेते हैं। वे दूसरों का अहित करने में सहस्रबाहु के समान वीर हैं, दूसरों के दोष हजार आँखों से देखते हैं, और उनका मन उस मक्खी के समान है जो दूसरों के हित रूपी घी को अपनी जान देकर भी खराब कर देती है।

आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस चौपाई 2 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik