वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन । नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन ॥ तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन । बरनउँ राम चरित भव मोचन ॥
Guru pad raj mridu manjul anjan. Nayan amia drig dosh bibhanjan. Tehin kari bimal bibek bilochan. Baranau ram charit bhav mochan.
श्रीगुरु महाराजके चरणोंकी रज कोमल और सुन्दर नयनामृत-अञ्जन है, जो नेत्रोंके दोषोंका नाश करनेवाला है। उस अञ्जनसे विवेकरूपी नेत्रोंको निर्मल करके मैं संसाररूपी बन्धनसे छुड़ानेवाले श्रीरामचरित्रका वर्णन करता हूँ ॥ १ ॥
गुरु के चरणों की धूल को एक कोमल, सुंदर और नयनामृत अंजन बताया गया है जो आँखों के दोष मिटाता है। तुलसीदास जी कहते हैं कि इसी अंजन से अपने विवेक रूपी नेत्रों को निर्मल कर वे संसार बंधन से मुक्त करने वाले श्रीराम के चरित्र का वर्णन कर रहे हैं।
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