वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
बंदउँ प्रथम महीसुर चरना । मोह जनित संसय सब हरना ॥ सुजन समाज सकल गुन खानी । करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी ॥
Bandau pratham mahisur charana. Moh janit sansay sab harana. Sujan samaj sakal gun khani. Karau pranam saprem subani.
पहले पृथ्वीके देवता ब्राह्मणोंके चरणोंकी वन्दना करता हूँ, जो अज्ञानसे उत्पन्न सब संदेहोंको हरनेवाले हैं। फिर सब गुणोंकी खान संत-समाजको प्रेमसहित सुन्दर वाणीसे प्रणाम करता हूँ ॥ २ ॥
तुलसीदास जी सबसे पहले पृथ्वी के देवता स्वरूप ब्राह्मणों (महीसुर) के चरणों की वंदना करते हैं जो अज्ञान से पैदा हुए संदेहों को हरने वाले हैं। उसके बाद वे सभी गुणों की खान संत-समाज को प्रेम पूर्वक सुंदर वाणी से प्रणाम करते हैं।
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