वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
मज्जन फल पेखिअ ततकाला । काक होहिं पिक बकउ मराला ॥ सुनि आचरज करै जनि कोई । सतसंगति महिमा नहिं गोई ॥
Majjan phal pekhiu tatkala. Kak hohi pik bakau marala. Suni acharaj karai jani koi. Satsangati mahima nahi goi.
इस तीर्थराजमें स्नानका फल तत्काल ऐसा देखनेमें आता है कि कौए कोयल बन जाते हैं और बगुले हंस। यह सुनकर कोई आश्चर्य न करे, क्योंकि सत्संगकी महिमा छिपी नहीं है॥ १ ॥
संत समाज रूपी तीर्थराज में स्नान (सत्संग) का फल तुरंत देखने को मिलता है, जहाँ कौए कोयल बन जाते हैं और बगुले हंस बन जाते हैं। सत्संग की यह महिमा किसी से छिपी नहीं है, इसलिए इस पर कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए।
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