ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 1

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

मज्जन फल पेखिअ ततकाला । काक होहिं पिक बकउ मराला ॥ सुनि आचरज करै जनि कोई । सतसंगति महिमा नहिं गोई ॥

Majjan phal pekhiu tatkala. Kak hohi pik bakau marala. Suni acharaj karai jani koi. Satsangati mahima nahi goi.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इस तीर्थराजमें स्नानका फल तत्काल ऐसा देखनेमें आता है कि कौए कोयल बन जाते हैं और बगुले हंस। यह सुनकर कोई आश्चर्य न करे, क्योंकि सत्संगकी महिमा छिपी नहीं है॥ १ ॥

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

संत समाज रूपी तीर्थराज में स्नान (सत्संग) का फल तुरंत देखने को मिलता है, जहाँ कौए कोयल बन जाते हैं और बगुले हंस बन जाते हैं। सत्संग की यह महिमा किसी से छिपी नहीं है, इसलिए इस पर कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए।

आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस