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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 2

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

बालमीक नारद घटजोनी । निज निज मुखनि कही निज होनी ॥ जलचर थलचर नभचर नाना । जे जड़ चेतन जीव जहाना ॥

Balamik narad ghatajoni. Nij nij mukhani kahi nij honi. Jalachar thalachar nabhachar nana. Je jad chetan jiv jahana.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वाल्मीकिजी, नारदजी और अगस्त्यजीने अपने-अपने मुखोंसे अपनी होनी(जीवनका वृत्तान्त) कही है। जलमें रहनेवाले, जमीनपर चलनेवाले और आकाशमें विचरनेवाले नाना प्रकारके जड़-चेतन जितने जीव इस जगत्में हैं, ॥ २ ॥

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

वाल्मीकि जी, नारद जी और अगस्त्य जी (घटजोनी) ने अपने-अपने मुख से अपने जीवन का वृत्तांत कहा है। जगत में जल, थल और आकाश में विचरने वाले जितने भी जड़-चेतन जीव हैं (उनका आगे की चौपाई से संबंध है)।

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 2 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik