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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 3

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

मति कीरति गति भूति भलाई । जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई ॥ सो जानब सतसंग प्रभाऊ । लोकहुँ बेद न आन उपाऊ ॥

Mati kirati gati bhuti bhalai. Jab jehin jatan jahan jehin pai. So janab satsang prabhau. Lokahu bed na an upau.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उनमेंसे जिसने जिस समय जहाँ कहीं भी जिस किसी यत्नसे बुद्धि, कीर्ति, सद्गति, विभूति (ऐश्वर्य) और भलाई पायी है, सो सब सत्संगका ही प्रभाव समझना चाहिये। वेदोंमें और लोकमें इनकी प्राप्तिका दूसरा कोई उपाय नहीं है ॥ ३ ॥

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिस किसी ने भी, जिस समय और जहाँ कहीं भी बुद्धि, कीर्ति, सद्गति, ऐश्वर्य (विभूति) और भलाई प्राप्त की है, उसे सत्संग का ही प्रभाव समझना चाहिए। लोक और वेदों में इनकी प्राप्ति का कोई दूसरा उपाय नहीं है।

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 3 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik