वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
मति कीरति गति भूति भलाई । जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई ॥ सो जानब सतसंग प्रभाऊ । लोकहुँ बेद न आन उपाऊ ॥
Mati kirati gati bhuti bhalai. Jab jehin jatan jahan jehin pai. So janab satsang prabhau. Lokahu bed na an upau.
उनमेंसे जिसने जिस समय जहाँ कहीं भी जिस किसी यत्नसे बुद्धि, कीर्ति, सद्गति, विभूति (ऐश्वर्य) और भलाई पायी है, सो सब सत्संगका ही प्रभाव समझना चाहिये। वेदोंमें और लोकमें इनकी प्राप्तिका दूसरा कोई उपाय नहीं है ॥ ३ ॥
जिस किसी ने भी, जिस समय और जहाँ कहीं भी बुद्धि, कीर्ति, सद्गति, ऐश्वर्य (विभूति) और भलाई प्राप्त की है, उसे सत्संग का ही प्रभाव समझना चाहिए। लोक और वेदों में इनकी प्राप्ति का कोई दूसरा उपाय नहीं है।
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