वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
बिनु सतसंग बिबेक न होई । राम कृपा बिनु सुलभ न सोई ॥ सतसंगत मुद मंगल मूला । सोइ फल सिधि सब साधन फूला ॥
Binu satsang bibek na hoi. Ram kripa binu sulabh na soi. Satsangat mud mangal mula. Soi phal sidhi sab sadhan phula.
सत्संगके बिना विवेक नहीं होता और श्रीरामजीकी कृपाके बिना वह सत्संग सहजमें मिलता नहीं। सत्संगति आनन्द और कल्याणकी जड़ है। सत्संगकी सिद्धि (प्राप्ति) ही फल है और सब साधन तो फूल हैं ॥ ४ ॥
सत्संग के बिना विवेक प्राप्त नहीं होता और श्री राम की कृपा के बिना सत्संग आसानी से नहीं मिलता। सत्संगति ही आनंद और कल्याण का मूल है। सत्संग की प्राप्ति ही मुख्य फल है, बाकी सभी साधन केवल फूल के समान हैं।
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