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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड चौपाई 1

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

नाम जीहँ जपि जागहिं जोगी । बिरति बिरंचि प्रपंच बियोगी ॥ ब्रह्मसुखहि अनुभवहिं अनूपा । अकथ अनामय नाम न रूपा ॥

Naam jeehan japi jaagahin jogi. Birati biranchi prapanch biyogi. Brahmasukhahi anubhavahin anoopa. Akath anaamay naam na roopa.

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

ब्रह्माके बनाये हुए इस प्रपञ्च (दृश्य जगत्) से भलीभाँति छूटे हुए वैराग्यवान् मुक्त योगी पुरुष इस नामको ही जीभसे जपते हुए [तत्त्वज्ञानरूपी दिनमें] जागते हैं और नाम तथा रूपसे रहित अनुपम, अनिर्वचनीय, अनामय ब्रह्मसुखका अनुभव करते हैं ॥ १ ॥

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