वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
दो० — राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार । तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर ॥ २१ ॥
Doha — Ram naam manideep dharu jeeh deharin dwar. Tulasi bhitar baherahun jaun chahasi ujiar.
तुलसीदासजी कहते हैं, यदि तू भीतर और बाहर दोनों ओर उजाला चाहता है तो मुखरूपी द्वारकी जीभरूपी देहलीपर रामनामरूपी मणि-दीपकको रख ॥ २१ ॥
आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस