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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 4

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं । जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं ॥ बंदउँ खल जस सेष सरोषा । सहस बदन बरनइ पर दोषा ॥

Par akaju lagi tanu pariharahin. Jimi him upal krishi dali garahin. Bandau khal jas sesh sarosha. Sahas badan baranai par dosha.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जैसे ओले खेतीका नाश करके आप भी गल जाते हैं, वैसे ही वे दूसरोंका काम बिगाड़नेके लिये अपना शरीरतक छोड़ देते हैं। मैं दुष्टोंको [हजार मुखवाले] शेषजीके समान समझकर प्रणाम करता हूँ, जो पराये दोषोंका हजार मुखोंसे बड़े रोषके साथ वर्णन करते हैं॥ ४ ॥

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

दुष्ट लोग दूसरों का काम बिगाड़ने के लिए अपने शरीर तक का नाश कर देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे ओले खेती को नष्ट करके खुद भी पिघल (गल) जाते हैं। उन्हें हजार मुख वाले शेषनाग के समान मानकर प्रणाम किया गया है क्योंकि वे हजार मुखों से क्रोधपूर्वक दूसरों के दोषों का वर्णन करते हैं।

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 4 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik