वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
मुद मंगलमय संत समाजू । जो जग जंगम तीरथराजू ॥ राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा । सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा ॥
Mud mangalamay sant samaju. Jo jag jangam tiratharajoo. Ram bhakti jaha surasari dhara. Sarasai brahma bichar prachara.
संतोंका समाज आनन्द और कल्याणमय है, जो जगत्में चलता-फिरता तीर्थराज (प्रयाग)है। जहाँ (उस संतसमाजरूपी प्रयागराजमें) रामभक्तिरूपी गङ्गाजीकी धारा है और ब्रह्मविचारका प्रचार सरस्वतीजी हैं॥ ४ ॥
संतों के समाज को चलता-फिरता तीर्थराज (प्रयाग) कहा गया है, जो आनंद और कल्याणमय है। इस संत समाज रूपी प्रयाग में रामभक्ति ही गंगा की धारा है और ब्रह्मविचार का प्रचार ही सरस्वती नदी है।
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