वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
बिधि निषेधमय कलिमल हरनी । करम कथा रबिनंदनि बरनी ॥ हरि हर कथा बिराजति बेनी । सुनत सकल मुद मंगल देनी ॥
Bidhi nishedhamay kalimal harani. Karam katha rabinandani barani. Hari har katha birajati beni. Sunat sakal mud mangal deni.
विधि और निषेध (यह करो और यह न करो) रूपी कर्मोंकी कथा कलियुगके पापोंको हरनेवाली सूर्यतनया यमुनाजी हैं और भगवान् विष्णु और शङ्करजीकी कथाएँ त्रिवेणीरूपसे सुशोभित हैं, जो सुनते ही सब आनन्द और कल्याणोंकी देनेवाली हैं॥ ५ ॥
विधि और निषेध (क्या करें, क्या न करें) रूपी कर्मों की कथा को कलियुग के पाप हरने वाली यमुना (रबिनंदनि) बताया गया है। भगवान विष्णु (हरि) और शंकर (हर) की कथाएँ त्रिवेणी हैं, जो सुनते ही आनंद और कल्याण देती हैं।
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