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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 6

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

बटु बिस्वास अचल निज धरमा । तीरथराज समाज सुकरमा ॥ सबहि सुलभ सब दिन सब देसा । सेवत सादर समन कलेसा ॥

Batu biswas achal nij dharama. Tiratharaj samaj sukarma. Sabahi sulabh sab din sab desa. Sevat sadar saman kalesa.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

[उस संतसमाजरूपी प्रयागमें] अपने धर्ममें जो अटल विश्वास है वह अक्षयवट है, और शुभकर्म ही उस तीर्थराजका समाज (परिकर) है। वह (संतसमाजरूपी प्रयागराज) सब देशोंमें, सब समय सभीको सहजहीमें प्राप्त हो सकता है और आदरपूर्वक सेवन करनेसे क्लेशोंको नष्ट करनेवाला है॥ ६ ॥

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अपने धर्म में अटल विश्वास को संत समाज रूपी प्रयाग का अक्षयवट कहा गया है और शुभकर्म को इसका परिकर (समाज) बताया गया है। यह तीर्थराज सभी देशों में और सभी समय आसानी से सुलभ है तथा आदरपूर्वक सेवन करने से क्लेशों को नष्ट करता है।

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