वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
अकथ अलौकिक तीरथराऊ । देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ ॥
Akath alaukik tiratharaoo. Dei sadya phal pragat prabhaoo.
वह तीर्थराज अलौकिक और अकथनीय है, एवं तत्काल फल देनेवाला है; उसका प्रभाव प्रत्यक्ष है॥ ७ ॥
इस संत समाज रूपी तीर्थराज (प्रयाग) को अलौकिक और अकथनीय बताया गया है। इसका प्रभाव प्रत्यक्ष है और यह तत्काल फल देने वाला है।
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