वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
बचन बज्र जेहि सदा पिआरा । सहस नयन पर दोष निहारा ॥
Bachan bajra jehi sada piara. Sahas nayan par dosh nihara.
जिनको कठोर वचनरूपी वज्र सदा प्यारा लगता है और जो हजार आँखोंसे दूसरोंके दोषोंको देखते हैं॥ ६ ॥
दुष्टों को कठोर वचन रूपी वज्र हमेशा प्रिय लगता है और वे दूसरों के दोषों को देखने के लिए हजार आँखों का उपयोग करते हैं (जैसे इंद्र हजार आँखों वाले हैं)।
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