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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 6

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी । कहत साधु महिमा सकुचानी ॥ सो मो सन कहि जात न कैसें । साक बनिक मनि गुन गन जैसें ॥

Bidhi hari har kabi kobid bani. Kahat sadhu mahima sakuchani. So mo san kahi jaat na kaisen. Saak banik mani gun gan jaisen.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

ब्रह्मा, विष्णु, शिव, कवि और पण्डितोंकी वाणी भी संत-महिमाका वर्णन करनेमें सकुचाती है; वह मुझसे किस प्रकार नहीं कही जाती, जैसे साग-तरकारी बेचनेवालेसे मणियोंके गुणसमूह नहीं कहे जा सकते ॥ ६ ॥

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

ब्रह्मा, विष्णु, शिव, कवि और पंडितों की वाणी भी संतों की महिमा का वर्णन करने में संकोच करती है। तुलसीदास जी कहते हैं कि वह महिमा मुझसे वैसे ही नहीं कही जा सकती, जैसे एक साग-सब्जी बेचने वाला मणियों के गुणों का वर्णन नहीं कर सकता।

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 6 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik