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ग्रन्थ

देवी भागवत पुराण(23)

देवी भागवत पुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 23 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शास्त्र ज्ञान

देवी भागवत और श्रीमद्भागवत में क्या अंतर है?

देवी भागवत: देवी/शक्ति केंद्रित (शाक्त)। श्रीमद्भागवत: कृष्ण/विष्णु (वैष्णव)। दोनों: 12 स्कंध, ~18,000 श्लोक। भागवत = सर्वलोकप्रिय। देवी भागवत = शक्ति उपासना।: भागवत = महापुराण (बहुसंख्यक मत)।

#देवी भागवत#श्रीमद्भागवत#अंतर
शिव भक्त कथा

विष्णु ने जलंधर का वेश धारण करके क्या किया

विष्णु ने ऋषि वेश में वृंदा से संपर्क किया, मायावी राक्षसों को भस्म कर प्रभावित किया, फिर मृत जलंधर के शरीर में प्रवेश कर लिया। वृंदा को छल का आभास नहीं हुआ, उसका सतीत्व भंग हुआ और तत्क्षण शिव ने जलंधर का वध किया।

#विष्णु जलंधर वेश#वृंदा छल#सतीत्व भंग
लोक

देवी भागवत पुराण में भुवर्लोक को देवी के स्वरूप में कहाँ बताया गया है?

देवी भागवत पुराण में भुवर्लोक को देवी के ब्रह्मांडीय स्वरूप की नाभि में स्थित बताया गया है — ठीक उसी प्रकार जैसे भागवत में विराट पुरुष की नाभि में।

#देवी भागवत#भुवर्लोक#नाभि
लोक

देवी भागवत में काव्या माता की कथा क्या है?

देवी भागवत में शुक्राचार्य की तपस्या और काव्या माता द्वारा असुरों की रक्षा का प्रसंग है।

#देवी भागवत#काव्या माता#शुक्राचार्य
लोक

मेदिनी निर्माण किस पुराण में बताया गया है?

मेदिनी निर्माण का प्रसंग हरिवंश, देवीभागवत और संबंधित पौराणिक परंपराओं में मिलता है।

#मेदिनी निर्माण#हरिवंश पुराण#देवीभागवत
लोक

तलातल में सभी ऋतुओं में भोग कैसे संभव है?

तलातल का वातावरण स्थिर और वसंत समान है, इसलिए वहाँ सभी ऋतुओं में सुख-भोग संभव बताया गया है।

#तलातल#सभी ऋतुएँ#भोग
लोक

देवी भागवत में तलातल के बारे में क्या कहा गया है?

देवी भागवत में तलातल को ऐसी गुफा कहा गया है जहाँ सभी ऋतुओं में भौतिक सुख भोगे जा सकते हैं।

#देवी भागवत#तलातल#भौतिक सुख
लोक

बल असुर ने 96 मायाएं कैसे बनाईं?

बल असुर ने अपने तपोबल और जादुई शक्तियों से 96 मायाएं बनाईं। आज भी पृथ्वी के मायावी लोग इनमें से एक-दो ही जानते हैं — इतनी जटिल हैं ये।

#96 माया#बल असुर#तपोबल
देवी पूजन और आवाहन

देवी को पंचामृत स्नान कराने से क्या फल मिलता है?

देवी स्नान के फल (देवी भागवत): ईख का रस = पुनर्जन्म से मुक्ति + लक्ष्मी-सरस्वती का वास। द्राक्षा रस = देवी-लोक में वास। सुगंधित जल = सौ जन्मों के पाप नाश। दूध = एक कल्प क्षीरसागर में निवास। शहद/घी/शर्करा = इस लोक-परलोक में असीम सुख।

#पंचामृत स्नान#ईख का रस#द्राक्षा रस
देवी पूजन और आवाहन

नवरात्रि में षोडशोपचार पूजा कैसे करें?

षोडशोपचार पूजा (देवी भागवत, एकादश स्कन्ध, अध्याय 18): 1. पीठ पूजा+ध्यान, 2. स्नान, 3. वस्त्र-आभूषण, 4. गंध-कुमकुम-सिंदूर, 5. पुष्प-बिल्वपत्र, 6. धूप-दीप, 7. नैवेद्य-तांबूल, 8. आरती-वाद्य, 9. प्रदक्षिणा-क्षमा प्रार्थना।

#षोडशोपचार पूजा#देवी भागवत#16 उपचार
पात्रता और शुद्धि

कलश स्थापना से पहले शरीर और मन की शुद्धि कैसे करें?

देवी भागवत: बाह्य शुद्धि (स्नान) + आभ्यंतर शुद्धि (मानसिक पवित्रता) अनिवार्य। आचमन: 'ॐ केशवाय स्वाहा, ॐ नारायणाय स्वाहा, ॐ माधवाय स्वाहा' — तीन बार जल ग्रहण (त्रिविध ताप शांति)। इसके बाद प्राणायाम से मन एकाग्र करें।

#बाह्य आभ्यंतर शुद्धि#आचमन#प्राणायाम
प्रकृति-पुरुष सिद्धांत

देवी भागवत पुराण में सृष्टि रचना का क्या वर्णन है?

देवी भागवत पुराण (तीसरा स्कंध): सृष्टि के आरंभ में केवल निर्गुण-निराकार परब्रह्म था। सृष्टि की इच्छा हुई → परब्रह्म ने स्वयं को दो भागों में विभक्त किया: बायाँ भाग = स्त्री (प्रकृति/शक्ति), दायाँ भाग = पुरुष (ब्रह्म/काल/शिव)।

#देवी भागवत#सृष्टि रचना#परब्रह्म विभक्त
मंत्र और स्तुति

'सर्वमंगल मांगल्ये' मंत्र का क्या अर्थ है?

'सर्वमंगल मांगल्ये...' = हे नारायणी! तुम सब मंगल करने वाली, शिव रूपा, सभी सिद्धियाँ देने वाली, शरण की रक्षक, तीन नेत्रों वाली गौरी हो — तुम्हें नमस्कार। विष्णु ने ब्रह्मा को उपदेश दिया: इसी आदिशक्ति की कृपा से त्रिदेव सृष्टि संचालन करते हैं।

#सर्वमंगल मांगल्ये#त्र्यम्बके गौरी#नारायणी
सरस्वती कवच और याज्ञवल्क्य स्तोत्र

सरस्वती कवच क्या है?

देवी भागवत पुराण (9.4): नारायण ने नारद को उपदेश दिया — सरस्वती कवच शरीर के प्रत्येक अंग (शिर, भाल, कर्ण, नेत्र, नासिका, ओष्ठ, कंठ, हस्त) की रक्षा करता है। यह तांत्रिक बीज मंत्रों (ऐं, ह्रीं, श्रीं, क्लीं) से युक्त है।

#सरस्वती कवच#देवी भागवत 9.4#नारायण नारद
उपासना और विधि

सरस्वती पूजा में कौन सी सामग्री अर्पित की जाती है?

देवी भागवत पुराण और तंत्र शास्त्र: सरस्वती पूजा सामग्री — ताज़ा मक्खन, दही, गाढ़ा दूध, सफेद तिल के लड्डू, गन्ने का रस, गुड़, सफेद चावल, नारियल जल और श्वेत कुंद के फूल।

#सरस्वती पूजा सामग्री#मक्खन दही#श्वेत कुंद
देवी भागवत पुराण का आख्यान

विष्णु ने विवाद में क्या निर्णय दिया?

विष्णु का निर्णय: (1) लक्ष्मी = सात्त्विक स्वभाव → बैकुंठ में रहेंगी; (2) गंगा → शिव की जटाओं में; (3) सरस्वती = एक अंश से भारत में नदी, पूर्ण अंश से ब्रह्मलोक → ब्रह्मा की शक्ति। विष्णु की जिह्वा में भी स्थान।

#विष्णु निर्णय#लक्ष्मी बैकुंठ#गंगा शिव
देवी भागवत पुराण का आख्यान

देवी भागवत पुराण में सरस्वती, लक्ष्मी और गंगा के विवाद की कथा क्या है?

देवी भागवत पुराण (नवम स्कंध): विष्णु का गंगा पर विशेष प्रेम → सरस्वती की ईर्ष्या → लक्ष्मी को श्राप (तुलसी/नदी), गंगा का सरस्वती को श्राप (नदी बनना), सरस्वती का गंगा को श्राप। यह क्रोध-ईर्ष्या के दुष्परिणामों का दार्शनिक संदेश है।

#विवाद कथा#सरस्वती लक्ष्मी गंगा#ईर्ष्या श्राप
गौरी-शंकर तत्व और साधना का आधार

गौरी-शंकर साधना किन ग्रंथों पर आधारित है?

गौरी-शंकर साधना शिवपुराण, स्कंदपुराण, देवीभागवत, कौमार तांत्र, आगमिक ग्रंथों, रामचरितमानस और शाक्त आगम पर आधारित है।

#शास्त्रीय आधार#शिवपुराण#स्कंदपुराण
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

१४ मुखी रुद्राक्ष के लिए किन विशिष्ट खाद्य पदार्थों का निषेध है?

देवी भागवत के अनुसार १४ मुखी रुद्राक्ष धारक को मांस, शराब, प्याज और लहसुन का त्याग करना चाहिए।

#14 मुखी#निषेध#देवी भागवत
पौराणिक कथा

माता का नाम 'दुर्गा' कैसे पड़ा? (देवी भागवत पुराण की कथा)

देवी भागवत पुराण के अनुसार, आदिशक्ति माता ने 'दुर्गम' (दुर्गमासुर) नामक एक अत्यंत भयंकर असुर का वध किया था। दुर्गम का वध करने के कारण ही उनका नाम 'दुर्गा' पड़ गया।

#दुर्गा नामकरण#दुर्गम वध#देवी भागवत
पौराणिक कथा

मासिक दुर्गाष्टमी पर दुर्गमासुर वध की कथा क्या है?

'दुर्गमासुर' नामक दैत्य ने वेदों को चुराकर धरती पर 100 साल का सूखा ला दिया था। तब माता ने प्रकट होकर उसका वध किया और धरती को बचाया। यह वध अष्टमी के दिन ही हुआ था।

#दुर्गमासुर#देवी भागवत#शाकम्भरी
पुराण परिचय

देवी भागवत क्या है?

देवी भागवत पुराण वेदव्यास रचित 18,000 श्लोक, 12 स्कंधों का ग्रंथ है। इसमें आदि शक्ति महामाया का माहात्म्य, देवी गीता (शाक्त दर्शन), दुर्गा-महिषासुर युद्ध, 108 शक्तिपीठ और नवदुर्गा उपासना का वर्णन है। नवरात्रि में इसका पाठ विशेष पुण्यकारी है।

#देवी भागवत#श्रीमद्देवीभागवत#शक्ति पुराण
देवी ग्रंथ

देवी भागवत पुराण का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?

देवी भागवत = शाक्त प्रमुख ग्रंथ (12 स्कंध, 318 अध्याय)। पाठ: नवरात्रि सर्वोत्तम, शुक्रवार, पूर्णिमा। 7 या 9 दिन में सम्पूर्ण। सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य। पूर्ण होने पर हवन+दान। विषय: देवी = सर्वोच्च ब्रह्म। फल: पाप नाश, भोग-मोक्ष।

#देवी भागवत#पुराण#पाठ विधि
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