ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
टैग

सिद्ध से जुड़े सभी प्रश्न(13)

सिद्ध पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 13 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

योग साधना से महर्लोक कैसे मिलता है?

अष्टांग योग, सिद्धियाँ और संन्यास के माध्यम से सिद्ध योगी अपने प्राणों को स्वेच्छा से महर्लोक में ले जा सकते हैं। भागवत (११.२४.१४) यही कहता है।

#योग#महर्लोक#अष्टांग योग
मंत्र जप विधि

मानस जप क्या है और इसे कैसे सिद्ध करें?

मन में (होंठ नहीं हिलें) = 1000 गुना। क्रम: वाचिक→उपांशु→मानस। श्वास संयोजन। ~6 मास अभ्यास। सिद्धि: अजपा जप = मंत्र स्वतः चलता रहे (सोते-जागते)।

#मानस#जप#सिद्ध
लोक

सिद्ध और चारण कौन होते हैं?

सिद्ध अष्ट-सिद्धियों से युक्त महात्माएं हैं, चारण देवताओं की कीर्ति का गान करने वाले और विद्याधर दिव्य विद्याओं के धारक हैं।

#सिद्ध#चारण#विद्याधर
यंत्र साधना

तंत्र में यंत्र को सिद्ध करने की विधि क्या है?

शुद्धि (गंगाजल+पंचामृत) → प्राण प्रतिष्ठा → अभिमंत्रण (सवा लाख/108 जप) → हवन (दशांश) → नित्य पूजा (दीपक+मंत्र)। नवरात्रि/दीपावली/शुक्रवार। गुरु/पुरोहित अनुशंसित।

#यंत्र#सिद्ध#विधि
लोक

भुवर्लोक के ऊपरी और निचले हिस्से में क्या अंतर है?

ऊपरी भुवर्लोक में सिद्ध, चारण और विद्याधर जैसी सात्त्विक सत्ताएं रहती हैं जबकि निचले हिस्से में यक्ष, राक्षस, भूत और प्रेत जैसी तामसिक सत्ताएं विचरण करती हैं।

#भुवर्लोक#ऊपरी हिस्सा#निचला हिस्सा
लोक

भीष्म पितामह की मृत्यु के समय भुवर्लोक के निवासियों ने क्या किया?

भीष्म पितामह के देह त्याग के समय भुवर्लोक के सिद्ध, चारण और विद्याधर वहाँ एकत्रित हुए और अंतरिक्ष से पुष्पों की भारी वर्षा की।

#भीष्म पितामह#भुवर्लोक#सिद्ध
लोक

भुवर्लोक में कौन-कौन सी सत्ताएं रहती हैं?

भुवर्लोक में ऊपरी भाग में सिद्ध, चारण और विद्याधर रहते हैं जबकि निचले भाग में यक्ष, राक्षस, भूत, प्रेत और पिशाच विचरण करते हैं।

#भुवर्लोक#निवासी#सिद्ध
तंत्र साधना

तंत्र साधना में सिद्ध स्थान कैसे पहचानें?

ऊर्जा अनुभव (बिना कारण शांति/कंपन), नदी/पर्वत/गुफा, प्राचीन मंदिर/शक्तिपीठ, श्मशान/संगम, स्थानीय परंपरा। कामाख्या/काशी/तारापीठ। 'ध्यान सहज गहन = सिद्ध।' घर भी।

#सिद्ध#स्थान#पहचानें
लोक

जनलोक के निवासियों का आध्यात्मिक बल कैसा होता है?

जनलोक के निवासियों का आध्यात्मिक बल ब्रह्मा के समान बताया गया है, पर उनके पास ब्रह्मा जैसा सृष्टि-अधिकार नहीं होता।

#जनलोक#आध्यात्मिक बल#ब्रह्मा
लोक

जनलोक तक कौन पहुँच सकता है?

जनलोक निष्काम योगियों, सिद्धों, सन्यासियों और नैष्ठिक ब्रह्मचारियों को प्राप्त होता है।

#जनलोक प्राप्ति#योगी#सिद्ध
शिव शाबर मंत्र

शाबर मंत्रों के संदर्भ में 'नाथपंथ' का क्या योगदान है?

नाथ सिद्धों और गुरु गोरखनाथ ने शाबर मंत्रों को लोक-कल्याण के लिए सुरक्षित और प्रचारित किया।

#नाथपंथ#गोरखनाथ#सिद्ध
रुद्राक्ष

रुद्राक्ष को सिद्ध कैसे करें पहनने से पहले

गंगाजल+दूध+शहद 24 घंटे → पंचामृत स्नान → शिव पूजा → 'ॐ नमः शिवाय' 108 बार (रुद्राक्ष हाथ में) → धूप → धारण। सरल विधि पर्याप्त। विस्तृत: पुरोहित से।

#रुद्राक्ष#सिद्ध#अभिमंत्रित
मंत्र विधि

सिद्ध मंत्र और असिद्ध मंत्र में क्या भेद है?

सिद्ध = चैतन्य/जागृत (पुरश्चरण पूर्ण या गुरु दीक्षा) → शीघ्र फल। असिद्ध = निद्रित (बिना पुरश्चरण/दीक्षा) → विलंबित फल। सिद्ध कैसे: पुरश्चरण, गुरु दीक्षा, दीर्घकालीन नियमित जप। नाम जप (राम/कृष्ण) = सदा सिद्ध — दीक्षा अनिवार्य नहीं।

#सिद्ध#असिद्ध#मंत्र
सम्पूर्ण प्रश्नोत्तरी
सभी प्रश्न देखें

10,000+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — श्रेणी, हब और टैग में सजे।

टैग खोज
अन्य टैग देखें

पूजा, मंत्र, साधना, उपाय, ज्योतिष — विषय अनुसार छाँटे गए सभी टैग।