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क्या है

वेदांत क्या है?(15)

वेदांत का अर्थवेदांत क्या है?वेदांत का महत्व
सरल उत्तर

अद्वैत वेदांत का सरल अर्थ है — ब्रह्म ही एकमात्र परम सत्य है, यह जगत माया के कारण भिन्न प्रतीत होता है पर वास्तव में अभिन्न है, और जीव ब्रह्म से अलग नहीं बल्कि ब्रह्म ही है। जब यह ज्ञान होता है तो मोक्ष मिलता है।

स्रोत प्रश्न: अद्वैत वेदांत का सरल अर्थ क्या है? →
दर्शन

विशिष्टाद्वैत क्या है रामानुज के अनुसार?

विशिष्टाद्वैत (रामानुज, 1017-1137): ब्रह्म एक पर सगुण। जीव+जगत = ब्रह्म के विशेषण/अंग (वृक्ष-शाखा, सूर्य-किरण)। जगत सत्य (मिथ्या नहीं)। मोक्ष = भक्ति/प्रपत्ति से, वैकुंठ में नारायण सेवा। शंकर के मायावाद का खंडन।

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उपनिषद

उपनिषद क्या हैं?

उपनिषद = गुरु के समीप बैठकर प्राप्त ब्रह्मज्ञान। वेद का अंतिम व उच्चतम भाग — इसीलिए 'वेदांत'। विषय: ब्रह्म, आत्मा, मोक्ष, माया। गीता + ब्रह्मसूत्र + उपनिषद = प्रस्थानत्रयी। ज्ञान प्रधान, कर्मकांड गौण।

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लोक

एकोऽहं बहुस्याम का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है कि एक परम चेतना अनेक रूपों में प्रकट होना चाहती है।

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दक्षिणामूर्ति साधना

अहं ब्रह्मास्मि का मतलब क्या है?

'अहं ब्रह्मास्मि' का अर्थ है 'मैं ही ब्रह्म हूँ', जो जीव और ब्रह्म की एकता को बताता है।

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दक्षिणामूर्ति साधना

शांति पाठ पूर्णमदः मंत्र क्या है?

शांति पाठ मंत्र: 'ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम्...' यह साधना की पूर्णता का प्रतीक है।

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जीवन एवं मृत्यु

सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

सूक्ष्म शरीर वह अदृश्य आवरण है जो मन, बुद्धि, अहंकार, इंद्रियों और प्राणों से बना होता है। यही एक जन्म से दूसरे जन्म में जाता है और इसमें सभी कर्मसंस्कार संचित रहते हैं।

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वेद एवं उपनिषद

अद्वैत वेदांत का सरल अर्थ क्या है?

अद्वैत वेदांत का सरल अर्थ है — ब्रह्म ही एकमात्र परम सत्य है, यह जगत माया के कारण भिन्न प्रतीत होता है पर वास्तव में अभिन्न है, और जीव ब्रह्म से अलग नहीं बल्कि ब्रह्म ही है। जब यह ज्ञान होता है तो मोक्ष मिलता है।

#अद्वैत#शंकराचार्य#वेदांत
वेद एवं उपनिषद

ब्रह्म सूत्र क्या है?

ब्रह्मसूत्र महर्षि बादरायण (वेदव्यास) द्वारा रचित वेदांत दर्शन का मूलग्रंथ है जिसमें 555 सूत्रों में उपनिषदों का दार्शनिक सार प्रस्तुत किया गया है। यह प्रस्थानत्रयी का तीसरा ग्रंथ है और इस पर शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और मध्वाचार्य ने महत्वपूर्ण भाष्य लिखे।

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हिंदू दर्शन

उपनिषद क्या हैं और कितने उपनिषद हैं

उपनिषद = वेदों का अंतिम भाग (वेदांत), गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान। कुल 108 (मुक्तिकोपनिषद अनुसार), प्रमुख 10-11 (शंकराचार्य भाष्य)। सबसे महत्वपूर्ण: ईशावास्य, कठ, मांडूक्य, छांदोग्य, बृहदारण्यक। चार महावाक्य — 'प्रज्ञानं ब्रह्म', 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि', 'अयमात्मा ब्रह्म'।

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हिंदू दर्शन

सच्चिदानंद का अर्थ क्या है

सच्चिदानंद = सत् (शाश्वत अस्तित्व) + चित् (शुद्ध चेतना/ज्ञान) + आनंद (परम सुख)। यह ब्रह्म और आत्मा का स्वरूप है। तैत्तिरीय उपनिषद — 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म'। सरल अर्थ: मैं हूं + मैं जानता हूं + मैं आनंदित हूं = आत्मा का मूल स्वभाव।

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सनातन दर्शन

सनातन धर्म क्या है?

सनातन धर्म शाश्वत, अपौरुषेय (किसी एक के द्वारा नहीं बनाया) जीवन दर्शन है। इसकी विशेषताएं: वेद प्रामाण्य, 'एकं सद् विप्रा बहुधा वदंति' (सत्य एक — मार्ग अनेक), चार पुरुषार्थ (धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष), कर्म-पुनर्जन्म और 'वसुधैव कुटुम्बकम्'।

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उपनिषद परिचय

उपनिषद क्या हैं?

उपनिषद वेदों का दार्शनिक भाग है — गुरु के निकट बैठकर प्राप्त रहस्य ज्ञान। 108 उपनिषद हैं, 10 प्रमुख हैं। चार महावाक्य: 'प्रज्ञानं ब्रह्म', 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि', 'अयमात्मा ब्रह्म'। सार: आत्मा और परमात्मा एक हैं — यही वेदांत का केंद्रीय सत्य है।

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गीता दर्शन

गीता का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

गीता प्रस्थानत्रयी का स्तंभ, साक्षात् ईश्वर-वाणी और वेदांत का सार है। यह सभी योग-मार्गों का समन्वय करने वाला, सर्वकालिक और सार्वभौमिक ग्रंथ है। यह मानव को विषाद से ज्ञान की ओर ले जाता है।

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शास्त्र ज्ञान

हिंदू धर्म में उपनिषद का महत्व क्या है?

उपनिषद वेदों का सार और वेदांत के आधार-ग्रंथ हैं। इनमें आत्मा-ब्रह्म की एकता का परम ज्ञान है। चार महावाक्य — 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि' आदि — उपनिषदों की सर्वोच्च शिक्षाएं हैं।

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सनातन सिद्धांत

ब्रह्म क्या है?

ब्रह्म इस सारे विश्व का परम सत्य है। तैत्तिरीय उपनिषद के अनुसार 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म' — ब्रह्म सत्य, ज्ञान और अनंत है। अद्वैत वेदांत के अनुसार 'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या' — ब्रह्म ही एकमात्र परम सत्य है।

#ब्रह्म#परब्रह्म#सच्चिदानंद
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