विस्तृत उत्तर
कर्ज के बोझ से मुक्ति के लिए हिंदू शास्त्रों में कई मंत्र और स्तोत्र वर्णित हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली दो हैं —
पहला है 'ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र'। कृष्णयामल ग्रंथ में उल्लेख है कि स्वयं भगवान शिव ने माँ पार्वती को यह स्तोत्र बताया था। इसका प्रमुख मंत्र है — 'सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे' — अर्थात माँ पार्वती के पुत्र (गणेश) सदा मेरे ऋण का नाश करें। इस स्तोत्र का पाठ बुधवार को विशेष रूप से करना चाहिए। प्रतिदिन एक बार पाठ करते हुए एक वर्ष करें, अथवा 21 या 31 दिन लगातार करें।
दूसरा है 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र'। इसमें मंगल ग्रह को ऋणहर्ता माना गया है — 'मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः' — अर्थात मंगल ऋण हरने वाले और धन देने वाले हैं। मंगलवार को इसका पाठ करें।
गणेश जी का ऋणमुक्ति मंत्र — 'ॐ गणेश ऋणं छिन्दि वरेण्यं हुं नमः फट्' — इसका 108 बार जप करें।
इसके साथ व्यावहारिक प्रयास भी आवश्यक हैं — आय बढ़ाने के उपाय करें, अनावश्यक व्यय घटाएं। मंत्र जप आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा देता है, जो ऋण चुकाने में मानसिक दृढ़ता प्रदान करता है।





