लोक“यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे” सिद्धांत में तपोलोक कैसे समझाया गया है?इस सिद्धांत में तपोलोक बाहरी ब्रह्मांड का लोक भी है और शरीर में ललाट या आज्ञा चक्र की चेतना भी।#यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे#तपोलोक#शरीर
लोकतपोलोक में रहने वाले जीव ध्यान और समाधि का आहार कैसे करते हैं?तपोलोक के जीव ध्यान, समाधि और ईश्वर के सामीप्य को ही अपना जीवन-स्रोत मानते हैं।#तपोलोक#ध्यान#समाधि
लोकतपोलोक का प्रकाश भौतिक प्रकाश से अलग कैसे है?तपोलोक का प्रकाश आत्म-तेज और तपस्या से उत्पन्न दिव्य प्रकाश है, जो आत्मा को शीतलता और ज्ञान देता है।#तपोलोक प्रकाश#दिव्य प्रकाश#आत्म तेज
लोकतपोलोक के निवासी भगवान वासुदेव से कैसे जुड़े हैं?तपोलोक के निवासी वासुदेव को समर्पित, ब्रह्म-ध्यान में लीन और निष्काम भक्ति वाले बताए गए हैं।#तपोलोक#वासुदेव#भक्ति
लोकवैराज देवगण तृष्णा से मुक्त कैसे माने गए हैं?वे विषय-भोग, धन, पद और ऐंद्रिक सुख की लालसा से मुक्त हैं, इसलिए तृष्णा-मुक्त माने गए हैं।#वैराज#तृष्णा#विषय भोग
लोकवायु पुराण में वैराज देवगणों की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?वायु पुराण के अनुसार वैराज देवगण ब्रह्मा जी के विराज स्वरूप से उत्पन्न हुए।#वायु पुराण#वैराज#उत्पत्ति
लोकध्रुवलोक से महर्लोक, जनलोक और तपोलोक की दूरी कैसे बताई गई है?ध्रुवलोक से महर्लोक एक करोड़, महर्लोक से जनलोक दो करोड़ और जनलोक से तपोलोक आठ करोड़ योजन ऊपर है।#ध्रुवलोक#महर्लोक#जनलोक
लोकविष्णु पुराण के अनुसार सूर्य से ध्रुवलोक तक की दूरी कैसे समझाई गई है?विष्णु पुराण में ग्रहों और सप्तर्षिमण्डल के क्रम से ध्रुवलोक को सूर्य से अड़तीस लाख योजन ऊपर बताया गया है।#विष्णु पुराण#सूर्य#ध्रुवलोक
लोकश्रीविष्णु पुराण में तपोलोक की दूरी कैसे बताई गई है?विष्णु पुराण तपोलोक को जनलोक से आठ करोड़ योजन ऊपर बताता है।#श्रीविष्णु पुराण#तपोलोक दूरी#जनलोक
लोकतपोलोक कैसे प्राप्त होता है?तपोलोक वैराग्य, षड्रिपु-नाश, ब्रह्म-ध्यान और वासुदेव-परायण साधना से प्राप्त होता है।#तपोलोक प्राप्ति#वैराग्य#ब्रह्म ध्यान
लोकतपोलोक में प्रकाश कैसे होता है?तपोलोक तपस्वियों और वैराज देवगणों के आत्म-तेज तथा तपस्या की ऊर्जा से प्रकाशित रहता है।#तपोलोक प्रकाश#आत्म तेज#तपस्या
लोकवैराज देवगणों की उत्पत्ति कैसे हुई?वैराज देवगण ब्रह्मा जी के विराज या विराट स्वरूप से प्रकट हुए अयोनिज देव हैं।#वैराज उत्पत्ति#विराज#ब्रह्मा
लोकतपोलोक में रहने वाले तपस्वी कैसे होते हैं?तपोलोक के तपस्वी शुद्ध चित्त, ऊर्ध्वरेता, जितेंद्रिय, विकाररहित और समाधिस्थ होते हैं।#तपस्वी#तपोलोक#जितेंद्रिय
लोकगीता का 'आब्रह्मभुवनाल्लोकाः' सत्यलोक पर कैसे लागू होता है?गीता (8.16) सकाम कर्मियों पर पूरी तरह लागू है — वे सत्यलोक से भी लौटते हैं। पर क्रम मुक्ति के अधिकारी नहीं लौटते — वे महाप्रलय में मोक्ष पाते हैं।#गीता 8.16#सत्यलोक#पुनरावर्तन
लोकचार कुमार सत्यलोक में कैसे जाते हैं?चार कुमारों का निवास तपोलोक में है पर अपनी परम शुद्धता और ज्ञान-शक्ति के कारण वे सत्यलोक और वैकुंठ में भी निर्बाध आ-जा सकते हैं।#चार कुमार#सत्यलोक#तपोलोक
लोकसत्यलोक कैसे जाते हैं?सत्यलोक जाने के लिए कठोर तपस्या, निष्काम भक्ति और अखंड ब्रह्मचर्य आवश्यक है। मृत्यु के बाद देवयान मार्ग से आत्मा सत्यलोक पहुँचती है।#सत्यलोक#यात्रा#देवयान
लोकबल असुर ने 96 मायाएं कैसे बनाईं?बल असुर ने अपने तपोबल और जादुई शक्तियों से 96 मायाएं बनाईं। आज भी पृथ्वी के मायावी लोग इनमें से एक-दो ही जानते हैं — इतनी जटिल हैं ये।#96 माया#बल असुर#तपोबल
लोकअतल लोक के भवन और महल कैसे हैं?अतल लोक के भवन और महल रत्नों व मणियों से बने हैं जिन्हें मय दानव और विश्वकर्मा ने बनाया। ये स्वर्ग के भवनों से भी अधिक भव्य हैं।#अतल लोक#भवन#महल