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विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण के अनुसार वैराज देवता किसी भी प्रकार की भौतिक प्यास से मुक्त हैं। दस्तावेज़ में स्पष्ट किया गया है कि प्यास का अर्थ केवल जल की प्यास नहीं है, बल्कि संसार के किसी भी विषय-भोग की लालसा, धन की कामना, पद की इच्छा या ऐंद्रिक सुख की तृष्णा का पूर्ण अभाव है। वे पूर्ण रूप से निवृत्ति मार्ग पर स्थित हैं। उनका मन और चेतना भगवान वासुदेव को समर्पित रहती है और वे ब्रह्म-ध्यान में लीन रहते हैं।
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