लोकगीता के 'आब्रह्मभुवनाल्लोकाः' का महर्लोक पर क्या अर्थ है?गीता (८.१६) का 'आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन' महर्लोक पर भी लागू है — यह भी पुनरावर्ती है। यहाँ से मोक्ष न मिला तो नई सृष्टि में वापसी होती है।#गीता 8.16#आब्रह्मभुवनाल्#महर्लोक
लोकमहर्लोक के निवासियों की 'विजय' विशेषता का क्या अर्थ है?विजय का अर्थ है — काम, क्रोध, लोभ, अज्ञान और काल के प्रभाव पर पूर्ण विजय। महर्लोक के ऋषियों पर षड्विकार और बुढ़ापे-रोग का कोई प्रभाव नहीं होता।#विजय#महर्लोक#काम
लोकमहर्लोक के निवासियों की 'स्थिति' (Sthiti) विशेषता का क्या अर्थ है?स्थिति का अर्थ है — बिना किसी विचलन के सम्पूर्ण कल्प (4 अरब 32 करोड़ वर्ष) तक एक ही ध्यान-अवस्था में रहना। यह महर्लोक के ऋषियों की असाधारण आध्यात्मिक स्थिरता का प्रमाण है।#स्थिति#महर्लोक#ध्यान
लोकमहर्लोक के श्लोक 'यथा मेढीस्तम्भ' का तात्विक अर्थ क्या है?यथा मेढीस्तम्भ श्लोक (भागवत ५.२३.३) कहता है — जैसे खंभे से बंधे पशु परिक्रमा करते हैं वैसे ही सभी ग्रह-नक्षत्र ध्रुवलोक के चारों ओर कल्पांत तक परिक्रमा करते हैं। महर्लोक इस चक्र से परे है।#यथा मेढीस्तम्भ#भागवत 5.23.3#ध्रुवलोक
लोकपिण्ड-ब्रह्माण्ड तादात्म्य में महर्लोक की ग्रीवा स्थिति का गूढ़ अर्थ क्या है?महर्लोक की ग्रीवा स्थिति का गूढ़ अर्थ — जैसे गर्दन धड़ और सिर को जोड़ती है वैसे ही महर्लोक भौतिक और आध्यात्मिक लोकों को जोड़ता है। यह विशुद्ध चक्र (सत्य का द्वार) का ब्रह्मांडीय समकक्ष है।#पिण्ड-ब्रह्माण्ड#ग्रीवा#महर्लोक
लोकमहर्लोक की 'कृतकाकृतक' प्रकृति का क्या अर्थ है?कृतकाकृतक = आंशिक रूप से विनाशी (कृतक) + आंशिक रूप से अविनाशी (अकृतक)। नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता पर निर्जन हो जाता है — यही इसकी मिश्र प्रकृति है।#कृतकाकृतक#महर्लोक#विष्णु पुराण
लोकविष्णु पुराण के 'गायन्ति देवाः' श्लोक का क्या अर्थ है?'गायन्ति देवाः' श्लोक में देवता कहते हैं — भारतवर्ष में जन्म लेने वाले हमसे भी धन्य हैं क्योंकि यह स्वर्ग और मोक्ष दोनों का द्वार है जो हमें भी दुर्लभ है।#गायन्ति देवाः#विष्णु पुराण#भारतवर्ष
लोकभुवर्लोक में 'विहाराजिरम्' का क्या अर्थ है?'विहाराजिरम्' का अर्थ है 'विचरण का क्षेत्र या क्रीड़ा-स्थल'। भागवत में यह भुवर्लोक के उस निचले हिस्से को कहते हैं जहाँ यक्ष, राक्षस, भूत और प्रेत विचरण करते हैं।#विहाराजिरम्#भुवर्लोक#यक्ष राक्षस
लोक'यावद्वायु: प्रवाति यावन्मेघा उपलभ्यन्ते' का क्या अर्थ है?इस श्लोक का अर्थ है — 'जहाँ तक वायु बहती है और जहाँ तक बादल दिखते हैं' — वह क्षेत्र भुवर्लोक (अंतरिक्ष) का निचला और मध्य हिस्सा है।#यावद्वायु#श्लोक अर्थ#भुवर्लोक
लोकभुवर्लोक की 'प्राण-मनस' अवधारणा का क्या अर्थ है?प्राण-मनस अवधारणा का अर्थ है कि भुवर्लोक प्राण (जीवन ऊर्जा) और मन (चेतना) का संगम क्षेत्र है। योग साधक प्राण-नियंत्रण से यहाँ की सिद्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं।#प्राण मनस#भुवर्लोक#वायु पुराण
लोकमेदिनी शब्द का अर्थ क्या है?मेदिनी पृथ्वी का नाम है, जो मधु कैटभ के मेद से बनी धरती से जुड़ा है।#मेदिनी#पृथ्वी#मेद
लोकमधु और कैटभ का अर्थ क्या है?मधु तमोगुण और कैटभ रजोगुण का प्रतीक माने जाते हैं।#मधु अर्थ#कैटभ अर्थ#असुर
लोकवराह अवतार की गर्जना का क्या अर्थ है?वराह की गर्जना आदिनाद का रौद्र रूप और सृष्टि-स्थापन की ध्वनि है।#वराह#गर्जना#आदिनाद
लोकयज्ञवराह का अर्थ क्या है?यज्ञवराह विष्णु का वेद, यज्ञ और ध्वनि से जुड़ा दिव्य वराह रूप है।#यज्ञवराह#वराह#विष्णु
लोकएकोऽहं बहुस्याम का अर्थ क्या है?इसका अर्थ है कि एक परम चेतना अनेक रूपों में प्रकट होना चाहती है।#एकोऽहं बहुस्याम#सृष्टि#वेदांत
लोकशेषनाग का अर्थ क्या है?शेषनाग वह अनंत आधार हैं जो प्रलय के बाद भी शेष रहते हैं।#शेषनाग#अनंत#विष्णु
लोकनाद-ब्रह्म का अर्थ क्या है?नाद-ब्रह्म का अर्थ है ध्वनि या कंपन को सृष्टि का मूल आधार मानना।#नाद-ब्रह्म#ध्वनि#सृष्टि
लोकक्षीरसागर का मतलब क्या है?क्षीरसागर सृष्टि के कारण-जल और अव्यक्त चेतना का प्रतीक है।#क्षीरसागर#अर्थ#कारण जल
लोकप्राणायाम का ब्रह्मांडीय अर्थ क्या है?प्राणायाम भीतर के प्राण और ऊर्जा को संतुलित करता है।#प्राणायाम#कुम्भक#ब्रह्मांड
लोकहृदय चक्र में स्पंदन का अर्थ क्या है?यह प्राण और जीवन-धारा के फिर जागने का संकेत है।#हृदय चक्र#स्पंदन#प्राण
लोकआज्ञा चक्र में स्पंदन का अर्थ क्या है?यह चेतना-केंद्र में दिव्य गति जागने का संकेत है।#आज्ञा चक्र#स्पंदन#महामाया
लोकचेतना अवरुद्ध होने का अर्थ क्या है?चेतना की गति और प्राण-संचार रुक जाना ही अवरोध है।#चेतना#अवरोध#प्राण
लोकश्वास अवरोध का अर्थ क्या है?श्वास अवरोध प्राण-प्रवाह के ठहरने को कहते हैं।#श्वास अवरोध#कुम्भक#प्राण
लोकनाभि-कमल का सरल अर्थ क्या है?यह विष्णु की नाभि से निकला सृष्टि-आरंभ का कमल है।#नाभि-कमल#सरल अर्थ#सृष्टि
लोकयोगनिद्रा से जागरण का मतलब क्या है?यह सृष्टि के नए चक्र की शुरुआत का संकेत है।#योगनिद्रा#जागरण#सृष्टि
लोकअहमेवासमेवाग्रे का सरल अर्थ क्या है?सृष्टि से पहले, बीच और अंत में केवल भगवान ही सत्य हैं।#अहमेवासमेवाग्रे#चतुःश्लोकी#अद्वैत
लोकयोगनिद्रा का मतलब क्या है?योगनिद्रा भगवान विष्णु की जागृत चेतन विश्राम अवस्था है।#योगनिद्रा#विष्णु#चेतना
लोकधाता यथा पूर्वमकल्पयत् का अर्थ क्या है?अर्थ है कि सृष्टि फिर पूर्ववत् रची जाती है।#धाता#सृष्टि#कल्प
लोकब्रह्मा के सौ वर्ष का अर्थ क्या है?यह ब्रह्मांडीय आयु का विशाल काल है जिसके बाद महाप्रलय आता है।#ब्रह्मा#काल#महाप्रलय
लोकवैकुण्ठ द्वार का अर्थ क्या है?वैकुण्ठ द्वार दिव्य प्रवेश और विकार-त्याग का प्रतीक है।#वैकुण्ठ द्वार#मोक्ष#भक्ति
लोकवैकुण्ठ की आधारशिला का अर्थ क्या है?वैकुण्ठ ऊर्जा का सृष्टि से जुड़ना।#वैकुण्ठ आधारशिला#आधार शक्ति#सृष्टि
लोकगयाकूप श्लोक का अर्थ क्या है?गयाकूप पिण्डदान ब्रह्मलोक गति देता है।#गयाकूप श्लोक#गरुड़ पुराण#ब्रह्मलोक
लोकश्राद्ध का अर्थ क्या है?श्रद्धा से पितरों के लिए किया गया अर्पण श्राद्ध है।#श्राद्ध अर्थ#श्रद्धा#पितृ कर्म
लोकअविवाहित मृत्यु का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?गृहस्थ आश्रम से पहले मृत्यु को अविवाहित मृत्यु की अपूर्ण अवस्था माना गया है।#अविवाहित मृत्यु#आध्यात्मिक अर्थ#गृहस्थ आश्रम
लोकश्राद्ध का अर्थ क्या है?श्रद्धा और विधि से पितरों को अर्पित कर्म श्राद्ध है।#श्राद्ध अर्थ#श्रद्धा#पितृ कर्म
लोकश्राद्ध का अर्थ क्या है?श्रद्धा से पितरों के लिए किया गया शास्त्रोक्त दान श्राद्ध है।#श्राद्ध अर्थ#श्रद्धा#पितृ कर्म
लोकश्राद्ध का अर्थ क्या है?श्रद्धा और विधि से पितरों के लिए किया गया दान श्राद्ध है।#श्राद्ध अर्थ#ब्रह्म पुराण#पितृ कर्म
लोकतर्पण का शाब्दिक अर्थ क्या है?तर्पण का अर्थ है पितरों को जल, तिल और मंत्रों से तृप्त करना।#तर्पण अर्थ#पितृ तृप्ति#श्राद्ध
लोकप्रेत पिण्ड को पितृ पिण्डों में मिलाने का अर्थ क्या है?प्रेत पिण्ड का पितृ पिण्डों में मिलना मृतात्मा के पितृ मंडल में प्रवेश का संकेत है।#प्रेत पिण्ड#पितृ पिण्ड#सपिण्डीकरण
लोकसपिण्ड का अर्थ क्या होता है?सपिण्ड वे हैं जो एक ही वंश, रक्त या मूल शरीर से जुड़े हुए माने जाते हैं।#सपिण्ड#पिण्ड#वंश
लोकपितृ तत्त्व का असली अर्थ क्या है?पितृ तत्त्व मृत पूर्वज की वह पारलौकिक अवस्था है जिसमें सपिण्डीकरण के बाद आत्मा पितृ पद प्राप्त करती है।#पितृ तत्त्व#पूर्वज#पितृलोक
लोकतीन पीढ़ियों से 46 अंश मिलने का क्या अर्थ है?४६ अंश का अर्थ है कि पिता, दादा और परदादा का शरीर पर सबसे बड़ा पैतृक योगदान है।#46 अंश#तीन पीढ़ी#पितृ ऋण