विस्तृत उत्तर
वैकुण्ठ का भाव है ऐसा लोक जहाँ कुंठा, चिंता, भय और शोक नहीं होते। वहाँ मुक्त जीव सच्चिदानंद स्वरूप में रहते हैं।
वैकुण्ठ का अर्थ क्या है को संदर्भ सहित समझें
वैकुण्ठ का अर्थ क्या है का सबसे सीधा सार यह है: वैकुण्ठ वह धाम है जहाँ कोई कुंठा या भय नहीं होता।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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ध्यान में शिव का तीसरा नेत्र दिखने का क्या मतलब है?
शिव कृपा (अज्ञान दहन+ज्ञान), आज्ञा सक्रिय, आत्मज्ञान निकट, वैराग्य (काम दहन)। अत्यंत दुर्लभ+शुभ! 'ॐ नमः शिवाय', अभिषेक, गुरु share। वास्तविक=जीवन परिवर्तन।
ध्यान में अनाहत नाद सुनाई देने का क्या अर्थ है?
'बिना आघात ध्वनि' = आंतरिक। हठ योग: 10 नाद (चिनी→ॐ)। अनाहत/हृदय सक्रिय। नाद योग: 'सुनना=सर्वोत्तम।' ध्वनि में डूबें→शून्य ओर। कृष्ण बांसुरी=भक्ति। गुरु confirm।
श्री चक्र की पूजा विधि और नौ आवरणों का क्या अर्थ है?
9 आवरण (बाहर→केंद्र): 1.भूपुर→2.16 कमल→3.8 कमल→4.14 त्रिकोण→5.10 बाह्य→6.10 आंतर→7.8 त्रिकोण→8.त्रिकोण→9.बिंदु (ललिता)। नवावरण पूजा = प्रत्येक आवरण के देवता। गुरु अनिवार्य।
स्वप्न में शिवलिंग दिखने का क्या अर्थ है?
अत्यंत शुभ — शिव कृपा, साधना सही, कुंडलिनी प्रगति, विघ्न नाश। श्वेत=शांति, अभिषेक=कृपा, टूटा=पूजा कमी। करें: पंचाक्षरी, अभिषेक, सोमवार।
मंदिर में भगवान को पंखा झलने की सेवा का क्या अर्थ है?
राजसेवा (भगवान=राजा), सुख (गर्मी दूर), वायु शुद्धि, षोडशोपचार (व्यजन), दास भाव। चामर (याक)/चंदन पंखा। जगन्नाथ/श्रीनाथजी = विशेष भक्त अनुमति।
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