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विस्तृत उत्तर
यज्ञवराह का अर्थ है भगवान विष्णु का वह वराह रूप जो यज्ञ, वेद और दिव्य ध्वनि का मूर्त स्वरूप माना गया है। इस कथा में वराह केवल पशु रूप नहीं, बल्कि आदिनाद और प्रथम श्वास से साकार हुई दिव्य शक्ति है। उनका शरीर और गर्जना सृष्टि-रक्षा के आध्यात्मिक अर्थ से भरे हैं। वे पृथ्वी को अज्ञान के जल से बाहर उठाकर धर्म की स्थापना का मार्ग बनाते हैं।
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