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विस्तृत उत्तर
तीन पीढ़ियों से ४६ अंश मिलने का अर्थ है कि यजमान के वर्तमान शरीर में पिता, पितामह और प्रपितामह का सबसे बड़ा आनुवंशिक योगदान है। पूर्वजों से प्राप्त कुल ५६ अंशों में पिता से २१, पितामह से १५ और प्रपितामह से १० अंश मिलते हैं। इनका योग ४६ अंश है, जो ५६ पैतृक अंशों का बहुत बड़ा हिस्सा है। इसी कारण व्यक्ति का पितृ-ऋण मुख्य रूप से इन तीन पीढ़ियों के प्रति माना गया है और इन्हें प्रत्यक्ष पूर्ण पिण्ड दिया जाता है।
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