विस्तृत उत्तर
माँ मातंगी (राज मातंगी) का ध्यान श्लोक:
श्यामांगीं शशिशेखरां त्रिनयनां वेदैः करैर्बिभ्रतीं, पाशं खेटमथांकुशं दृढमसिं नाशाय भक्तद्विषाम्। रत्नालंकरणप्रभोज्जवलतनुं भास्वत्किरीटां शुभां, मातंगीं मनसा स्मरामि सदयां सर्वाथसिद्धिप्रदाम्॥
अर्थ: श्याम वर्ण वाली, मस्तक पर चंद्र धारण करने वाली, तीन नेत्रों वाली, अपने हाथों में वेद, पाश, खेट (ढाल), अंकुश और तलवार धारण करने वाली, भक्तों के शत्रुओं का नाश करने वाली, रत्न आभूषणों से उज्ज्वल शरीर वाली, प्रकाशमान किरीट वाली, शुभ, दयालु, सभी अर्थों को सिद्ध करने वाली मातंगी का मैं मन से स्मरण करता हूँ।





