विस्तृत उत्तर
यात्रा की सुरक्षा के लिए ऋग्वेद का यह स्वस्ति मंत्र सर्वश्रेष्ठ है:
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥
अर्थ: महान कीर्ति वाले इंद्र, सर्वज्ञ पूषा (सूर्य), जिनके चक्र की गति अटूट है ऐसे गरुड़ देव (तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः) और बुद्धि के स्वामी बृहस्पति हमारा कल्याण करें।
यहाँ 'तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः' (गरुड़) का उल्लेख वाहन की गति और सुरक्षा के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि गरुड़ देव गति और वायुमंडल के अधिपति हैं।





