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मंत्र सिद्धि📜 मंत्र महोदधि — पुरश्चरण, कुलार्णव तंत्र — सिद्धि लक्षण, तंत्र शास्त्र1 मिनट पठन

मंत्र सिद्धि कैसे प्राप्त होती है?

संक्षिप्त उत्तर

मंत्र सिद्धि: पुरश्चरण (अक्षर × 1 लाख जप), फिर हवन-तर्पण-मार्जन-ब्राह्मण भोजन। काल में: एकभुक्त, ब्रह्मचर्य, सत्य वाणी। सिद्धि के लक्षण: स्वतः एकाग्रता, इष्ट देव दर्शन, मंत्र में लीनता। सरल: निरंतर नाम स्मरण — यही सर्वोच्च सिद्धि।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र सिद्धि की विधि मंत्र महोदधि और कुलार्णव तंत्र में विस्तार से वर्णित है:

मंत्र सिद्धि के पाँच चरण

1पुरश्चरण (मंत्र × 1 लाख)

मंत्र के अक्षरों की संख्या × 1,00,000 = पुरश्चरण की संख्या। 5 अक्षरी = 5 लाख जप।

2पंचकर्म

  • जप — मंत्र जप
  • हवन — जप संख्या का 1/10 हवन
  • तर्पण — हवन का 1/10
  • मार्जन — तर्पण का 1/10
  • ब्राह्मण भोजन — मार्जन का 1/10

3नियम

मंत्र महोदधि — पुरश्चरण काल में:

  • एक बार भोजन (एकभुक्त)
  • ब्रह्मचर्य
  • भूमि शयन
  • सत्य वाणी
  • मौन जितना संभव

4सिद्धि के लक्षण

कुलार्णव तंत्र:

  • जप में स्वतः एकाग्रता
  • इष्ट देव का स्वप्न में दर्शन
  • जप की गिनती भूल जाना (देव में लीन)
  • मंत्र की विलक्षण अनुभूति

5सरल सिद्धि

नाम सिद्धि' — भागवत: भगवान के नाम का निरंतर स्मरण ही सर्वोच्च सिद्धि है।
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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र महोदधि — पुरश्चरण, कुलार्णव तंत्र — सिद्धि लक्षण, तंत्र शास्त्र
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