विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार भगवान सभी की प्रार्थना सुनते हैं — परंतु जो प्रार्थना हृदय की गहराई से निकलती है, वह शीघ्र फलदायी होती है।
भगवत्कृपा पाने वाली प्रार्थना के गुण —
1. सच्चा और शुद्ध भाव — प्रार्थना में कोई दिखावा नहीं होना चाहिए। 'आरत सब कहे पुकारी' — जो व्याकुल होकर पुकारता है, भगवान उसकी सुनते हैं। ध्रुव ने व्याकुल होकर भगवान को पुकारा और उन्होंने साक्षात् दर्शन दिए।
2. विश्वास — 'ईश्वर है और वह सुनता है' — यह दृढ़ विश्वास प्रार्थना की शक्ति बढ़ाता है। संदेह से प्रार्थना निर्बल हो जाती है।
3. पवित्रता — स्नान करके, शुद्ध मन से की गई प्रार्थना अधिक प्रभावशाली होती है। मन में क्रोध, द्वेष या अहंकार हो तो पहले उन्हें शांत करें।
4. निःस्वार्थ प्रार्थना — केवल भौतिक माँग न करें। 'मुझे ज्ञान दो, मुझे भक्ति दो, मुझे सत्-बुद्धि दो' — ऐसी प्रार्थना सबसे शक्तिशाली है।
5. नियमितता — प्रतिदिन एक निश्चित समय पर प्रार्थना करने से उसकी शक्ति बढ़ती जाती है। भगवान निरंतर याद आने वाले भक्त को अपना मानते हैं।
6. कृतज्ञता का भाव — 'आपने जो दिया है उसके लिए धन्यवाद' — यह भाव प्रार्थना को पूर्ण बनाता है।
तुलसीदास जी ने लिखा — 'राम सो आरत, राम सो अभिमानी' — भगवान उसकी सुनते हैं जो आर्त (व्याकुल) हो, मान-अभिमान छोड़कर पुकारे।





