विस्तृत उत्तर
भगवान राम धर्म और मर्यादा के रक्षक हैं। वे नाराज नहीं होते परंतु जब कोई मर्यादा तोड़ता है, असत्य का आश्रय लेता है और वचन भंग करता है — तब राम-कृपा दूर होती है।
जीवन में संकेत — जब जीवन में सत्य बोलना असह्य लगे, वचन पालन में बाधा आए, परिवार में कलह रहे, रिश्तों में मर्यादा टूटती रहे — तब यह संकेत है कि जीवन राम के बताए मार्ग से विचलित हो रहा है।
तुलसीदास की चेतावनी — रामचरितमानस में तुलसीदास ने स्पष्ट कहा है — माला लेकर मंत्र जपने से और तिलक-छापा लगाने से राम प्रसन्न नहीं होते अगर मन कच्चा हो। केवल बाहरी पूजा और भीतर असत्य आचरण राम को प्रसन्न नहीं करते।
रामायण में वर्णित — रावण के पतन का कारण भी यही था — अहंकार और असत्य। रावण पंडित था, ज्ञानी था, परंतु मर्यादा का उल्लंघन उसे ले डूबा। यह कथा सबके लिए संदेश है।
सुधार — सत्य-आचरण, वचन-पालन, माता-पिता और गुरु का सम्मान, और राम नाम का सच्चा जप — ये राम को प्रसन्न करने के उपाय हैं।





