विस्तृत उत्तर
अनुष्ठान की समाप्ति पर, यजमान को शांत होकर महादेव से प्रार्थना करनी चाहिए। निष्कर्ष मंत्र (समापन) इस प्रकार है:
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः सुशांतिर् भवतु। अनेन कृते श्री रुद्राष्टाध्याई पाठ कर्मणा श्री भवानी शंकर महा रुद्रः प्रियताम्।
पाठ के समापन पर शांति मंत्रों का उच्चारण यह सुनिश्चित करता है कि यदि पाठ में कोई मात्रा या अक्षर भ्रष्ट रह गया हो, तो भी परमेश्वर उसे स्वीकार कर लें और पूर्ण फल प्रदान करें।





