विस्तृत उत्तर
पंचाक्षरी सिद्धि की विधि शिव पुराण और मंत्र महोदधि में वर्णित है:
पुरश्चरण — पाँच अक्षरों के लिए पाँच लाख
मंत्र महोदधि के अनुसार प्रत्येक अक्षर के लिए एक लाख जप का विधान है। पंचाक्षरी = 5 अक्षर → 5 लाख जप।
पुरश्चरण के पाँच चरण
- 1जप — 5,00,000 (पाँच लाख)
- 2हवन — जप का 1/10 = 50,000 आहुति
- 3तर्पण — हवन का 1/10 = 5,000
- 4मार्जन — तर्पण का 1/10 = 500
- 5ब्राह्मण भोजन — मार्जन का 1/10 = 50
साधना काल के नियम
- 1गुरु दीक्षा — शैव परंपरा में गुरु से दीक्षा आवश्यक है
- 2श्रावण मास — पुरश्चरण के लिए सर्वोत्तम
- 3ब्रह्मचर्य — साधना काल में
- 4एकभोजन — दिन में एक बार भोजन
- 5भूमिशयन — कठोर साधकों के लिए
- 6नित्य — 108 या 1008 जप प्रतिदिन
नित्य पुरश्चरण की गणना
5 लाख जप ÷ प्रतिदिन 1000 जप = 500 दिन (लगभग 17 महीने)
प्रतिदिन 2000 जप = 250 दिन (लगभग 8-9 महीने)
सिद्धि के संकेत
शैव आगम परंपरा के अनुसार पंचाक्षरी सिद्ध होने पर:
- ▸जप में अलौकिक शांति का अनुभव
- ▸स्वप्न में शिव या नंदी का दर्शन
- ▸मंत्र स्वतः मन में चलने लगे
- ▸भस्म या रुद्राक्ष की सुगंध का अनुभव
सामान्य साधकों के लिए
यदि पूर्ण पुरश्चरण संभव न हो तो:
- ▸प्रतिदिन 108 जप नियमित रखें
- ▸प्रत्येक सोमवार 1008 जप
- ▸श्रावण में 21 दिन निरंतर 1008 जप
— यह भी पंचाक्षरी के फल देता है।





