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अंतिम लक्ष्य📜 तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), महानिर्वाण तंत्र, कुलार्णव तंत्र1 मिनट पठन

तंत्र साधना का अंतिम लक्ष्य क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र का अंतिम लक्ष्य: महानिर्वाण — 'मोक्ष ही परम श्रेय।' तंत्रालोक: 'शिवः सोऽहम्' — ब्रह्मांडीय चेतना से एकता। प्रत्यभिज्ञा: 'मैं शिव को ढूंढ रहा था — वह मैं ही था।' कुलार्णव: सिद्धियाँ मार्ग, लक्ष्य नहीं।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र साधना का अंतिम लक्ष्य तंत्रालोक और महानिर्वाण तंत्र में वर्णित है:

महानिर्वाण तंत्र

मोक्ष एव परं श्रेयः सर्वतंत्रेषु निश्चितम्।' — सभी तंत्रों में मोक्ष ही परम श्रेय है।

तीन स्तरों पर लक्ष्य

1व्यावहारिक

  • रोग-बाधा से मुक्ति
  • समृद्धि और सिद्धियाँ

2साधना

  • मन की शांति, निर्भयता
  • आत्मशक्ति और अंतर्ज्ञान

3परम — तंत्रालोक

शिवः सोऽहम्।' — मैं शिव हूँ। सम्पूर्ण ब्रह्मांडीय चेतना के साथ एकता।

प्रत्यभिज्ञा

अभिनवगुप्त: तंत्र का अंतिम लक्ष्य = पुनर्पहचान — 'मैं शिव को ढूंढ रहा था — वह मैं ही था।'

कुलार्णव

सिद्धियाँ मार्ग हैं — लक्ष्य नहीं।' सिद्धियों के मोह में परम लक्ष्य न भूलें।

भक्ति तंत्र

जो देव के प्रेम में लीन हो जाए — वह तंत्र का परम साधक।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), महानिर्वाण तंत्र, कुलार्णव तंत्र
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