विजयलक्ष्मी का क्या स्वरूप है का सबसे सीधा सार यह है: विजयलक्ष्मी/जयलक्ष्मी = युद्ध ही नहीं, दैनिक जीवन की बाधाओं, मुकदमों, परीक्षाओं में भी जय और कीर्ति देती हैं। स्वरूप: लाल साड़ी, आठ भुजाएं, तलवार, ढाल, पाश, अभय मुद्रा।
अष्टलक्ष्मी जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
•उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।
•अष्टलक्ष्मी श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
•यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।