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विस्तृत उत्तर
युगों की सन्ध्या और सन्ध्यांश युग-काल से जुड़े अतिरिक्त कालखंड के रूप में बताए गए हैं। सत्ययुग चार हजार दिव्य वर्ष का है और उसके चार सौ वर्ष की सन्ध्या तथा चार सौ वर्ष का सन्ध्यांश है। त्रेता की सन्ध्या तीन सौ, द्वापर की दो सौ और कलि की एक सौ वर्ष कही गई है। अन्य तीन युगों के कुल सन्ध्यांश छह सौ वर्ष बताए गए हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 24-26, श्लोक 5-7 और 26-31
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