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सनातन सिद्धांत — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 11 प्रश्न

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सनातन सिद्धांत

धर्म का अर्थ क्या है?

धर्म = 'धृ' धातु — जो धारण करे/टिकाए। कर्तव्य + नैतिकता + सही आचरण। मनुस्मृति: 10 लक्षण (धैर्य, क्षमा, सत्य, अहिंसा...)। कणाद: जो उन्नति और मोक्ष दे। महाभारत: 'अहिंसा परमो धर्मः'। गीता: स्वधर्म ही श्रेष्ठ। उपनिषद: 'न हि सत्यात् परो धर्मः'।

धर्मस्वधर्मकर्तव्य
सनातन सिद्धांत

मोक्ष क्या है?

मोक्ष = जन्म-मृत्यु के चक्र से पूर्ण मुक्ति। चार पुरुषार्थों में सर्वोच्च। चार मार्ग: कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग, राज योग। अद्वैत: आत्मा = ब्रह्म (शंकर)। विशिष्टाद्वैत: आत्मा ईश्वर में (रामानुज)। द्वैत: भक्ति से (मध्व)। मोक्ष = सच्चिदानंद की अवस्था।

मोक्षमुक्तिजन्म-मृत्यु
सनातन सिद्धांत

पुनर्जन्म क्या है?

पुनर्जन्म = कर्म-बंधन के कारण आत्मा का नए शरीर में प्रवेश। गीता 2.22 — पुराना वस्त्र त्याग, नया वस्त्र — आत्मा का रूपक। आत्मा अजन्मा, अमर (कठोपनिषद)। कर्म अनुसार 84 लाख योनियाँ। गरुड़ पुराण में मृत्युपश्चात् यात्रा का वर्णन। मोक्ष = पुनर्जन्म चक्र से मुक्ति।

पुनर्जन्मआत्माजन्म-मृत्यु
सनातन सिद्धांत

कर्म सिद्धांत क्या है?

कर्म = विचार + वाणी + कर्म। कोई कर्म नष्ट नहीं होता। तीन प्रकार: संचित (पुराने कर्मों का भंडार), प्रारब्ध (इस जन्म का भोग/भाग्य), आगामी (वर्तमान कर्म — भविष्य बदलते हैं)। निष्काम कर्म = मुक्ति। ज्ञान से कर्म नष्ट होते हैं (गीता 4.37)।

कर्मकर्मफलसंचित कर्म
सनातन सिद्धांत

हिंदू धर्म में ज्ञान क्या है?

हिंदू धर्म में ज्ञान दो प्रकार का है — परा विद्या (ब्रह्म-ज्ञान) और अपरा विद्या (शास्त्रीय ज्ञान)। गीता (4/38) के अनुसार ज्ञान सबसे बड़ा पवित्रकर्ता है; आत्मा और ब्रह्म की एकता का साक्षात्कार ही परम ज्ञान है।

ज्ञानअपरा विद्यापरा विद्या
सनातन सिद्धांत

हिंदू धर्म में पुनर्जन्म क्यों होता है?

हिंदू धर्म में पुनर्जन्म का मुख्य कारण कर्म-बंधन, अपूर्ण वासनाएं और अज्ञान है। आत्मा अमर है — वह कर्मों का फल भोगने हेतु बार-बार नया शरीर धारण करती है; ज्ञान और मोक्ष-प्राप्ति से यह चक्र समाप्त होता है।

पुनर्जन्मकर्मआत्मा
सनातन सिद्धांत

हिंदू धर्म में कर्म का क्या महत्व है?

हिंदू धर्म में कर्म का अर्थ है — प्रत्येक कर्म का फल अवश्य मिलता है। गीता (2/47) का संदेश है — 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' — फल की आसक्ति छोड़कर कर्म करो। कर्म ही पुनर्जन्म का कारण है और निष्काम कर्म मोक्ष का मार्ग है।

कर्मकर्म सिद्धांतहिंदू धर्म
सनातन सिद्धांत

ब्रह्म क्या है?

ब्रह्म इस सारे विश्व का परम सत्य है। तैत्तिरीय उपनिषद के अनुसार 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म' — ब्रह्म सत्य, ज्ञान और अनंत है। अद्वैत वेदांत के अनुसार 'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या' — ब्रह्म ही एकमात्र परम सत्य है।

ब्रह्मपरब्रह्मसच्चिदानंद
सनातन सिद्धांत

परमात्मा क्या है?

परमात्मा वह सर्वोच्च, सर्वव्यापी और असीमित चेतना है जो तीनों लोकों में व्याप्त है। गीता (15/17) में उसे सबका धारण-पोषण करने वाला अविनाशी ईश्वर कहा गया है। वह सत्-चित्-आनंद स्वरूप है।

परमात्माईश्वरसर्वव्यापी
सनातन सिद्धांत

आत्मा क्या है?

आत्मा वह शाश्वत चेतन तत्व है जो प्रत्येक जीव में विद्यमान है। गीता (2/20) के अनुसार यह न जन्म लेती है, न मरती है, न शस्त्र से कटती है, न अग्नि से जलती है। यह नित्य, शाश्वत और अविनाशी है।

आत्माजीवात्माचेतना
सनातन सिद्धांत

आध्यात्मिक ज्ञान क्या है?

आध्यात्मिक ज्ञान वह 'परा विद्या' है जो आत्मा-परमात्मा के सत्य स्वरूप का बोध कराती है। मुण्डकोपनिषद के अनुसार यह लौकिक विद्याओं से श्रेष्ठ है। श्रवण, मनन और निदिध्यासन इसके तीन मार्ग हैं।

आध्यात्मिक ज्ञानआत्मज्ञानब्रह्मज्ञान

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।