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प्रकाश प्रश्नोत्तरी — 36 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रकाश विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 36 प्रश्न

लोक

महर्लोक में प्रकाश का स्रोत क्या है?

महर्लोक में भौतिक सूर्य का प्रकाश नहीं होता। यहाँ ऋषियों और सिद्ध योगियों का आन्तरिक तपोबल और दैवीय प्रकाश ही प्रकाश का स्रोत है।

महर्लोकप्रकाशतपोबल
लोक

अमरावती में रात और दिन कैसे होते हैं?

अमरावती में कभी अंधकार नहीं होता। प्रकाश देवताओं के दिव्य शरीरों, स्वर्ण महलों और रत्नों की आभा से उत्पन्न होता है। तापमान सदा वसंत ऋतु जैसा रहता है।

अमरावतीरात दिनप्रकाश
ध्यान अनुभव

ध्यान में पीला प्रकाश दिखना किस चक्र से संबंधित है?

मणिपुर (3rd — नाभि/अग्नि/पीला) +: 'पीला = आत्मा प्रकाश।' आत्मविश्वास↑, ऊर्जा↑, बुद्धि।: अंधेरा→नीला/पीला→सफेद = प्रगति।

पीलाप्रकाशचक्र
ध्यान अनुभव

ध्यान में नीला प्रकाश दिखने का क्या अर्थ होता है?

'नीला = आज्ञा चक्र + जीवात्मा। पीली परिधि = आत्मा प्रकाश।' आज्ञा सक्रिय, जीवात्मा दर्शन, ध्यान गहन। कृष्ण रंग (भक्ति)। साक्षी बनें — आगे बढ़ें।

ध्याननीलाप्रकाश
ध्यान अनुभव

ध्यान करते समय आँखों के सामने रंगीन प्रकाश दिखने का क्या अर्थ है?

चक्र अनुसार: लाल=मूलाधार, नारंगी=स्वाधिष्ठान, पीला=मणिपुर/आत्मा, हरा=अनाहत, नीला=आज्ञा/जीवात्मा, सफेद=सहस्रार।: 'अंधेरा→रंगीन→सफेद = प्रगति।' साक्षी बनें।

ध्यानरंगीनप्रकाश
लोक

प्रकाश और अंधकार कब अलग हुए?

विष्णु की प्रथम श्वास से गति आने पर प्रकाश और अंधकार अलग हुए।

प्रकाशअंधकारद्वैत
लोक

सूर्य फिर कैसे प्रज्वलित हुए?

प्राण-स्रोत लौटते ही सूर्य फिर प्रकाशित हुए।

सूर्यप्राणप्रकाश
लोक

प्रकाश और अंधकार कैसे अलग हुए?

द्वैत उत्पन्न होने से।

प्रकाशअंधकारद्वैत
लोक

आदित्य मोक्षोन्मुखी पितृ अवस्था के प्रतीक कैसे हैं?

आदित्य प्रकाश, ज्ञान और परमसत्य से जुड़े हैं, इसलिए वे पितृ की मोक्षोन्मुख उच्चतम अवस्था के प्रतीक हैं।

आदित्यमोक्षोन्मुखीपितृ अवस्था
लोक

पितृकर्म में आदित्यों की भूमिका क्या है?

आदित्य पितृकर्म में प्रपितामह के अधिष्ठाता हैं और ज्ञान, प्रकाश, आध्यात्मिक उन्नति तथा मोक्ष से जुड़े हैं।

आदित्य भूमिकापितृकर्मप्रपितामह
लोक

आदित्य काल और प्रकाश के देव क्यों माने गए हैं?

आदित्य 12 मासों और ब्रह्माण्डीय नियमों के नियामक हैं तथा जगत में प्रकाश और ज्ञान का संचार करते हैं।

आदित्यकालप्रकाश
लोक

पाताल लोक में सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश क्यों नहीं पहुँचता?

पाताल लोक पृथ्वी के नीचे अधोलोकों में स्थित है, इसलिए सूर्य-चंद्र का प्रत्यक्ष प्रकाश वहाँ नहीं पहुँचता; प्रकाश नागमणियों से होता है।

पाताल लोकसूर्यचंद्रमा
लोक

पाताल लोक में अंधेरा क्यों नहीं होता?

पाताल लोक में अंधेरा इसलिए नहीं होता क्योंकि महान नागों के फनों की दिव्य मणियाँ पूरे लोक को प्रकाशित करती रहती हैं।

पाताल लोकनागमणिप्रकाश
लोक

महातल लोक में सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश क्यों नहीं पहुँचता?

महातल पृथ्वी से 50,000 योजन नीचे है, इसलिए सूर्य-चंद्र का प्रकाश नहीं पहुँचता; प्रकाश नागमणियों से होता है।

महातल सूर्य चंद्रअधोलोक50,000 योजन
लोक

महातल लोक में अंधेरा क्यों नहीं होता?

महातल में नागों के फनों की दिव्य मणियाँ प्रकाश देती हैं, इसलिए वहाँ अंधकार नहीं रहता।

महातल अंधेरानागमणिप्रकाश
लोक

रसातल लोक में सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश क्यों नहीं पहुँचता?

रसातल बहुत नीचे स्थित अधोलोक है, इसलिए सूर्य-चंद्र की किरणें वहाँ नहीं पहुँचतीं; प्रकाश नाग-मणियों से होता है।

रसातल सूर्य चंद्रअधोलोकभूमिगत लोक
लोक

रसातल लोक में अंधेरा क्यों नहीं होता?

रसातल में महानागों के फनों की दिव्य मणियाँ प्रकाश देती हैं, इसलिए वहाँ अंधकार नहीं रहता।

रसातल अंधेरानाग मणिप्रकाश
लोक

वितल लोक में सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश कैसे होता है?

वितल में सूर्य-चंद्र का सीधा प्रकाश नहीं आता; नाग-मणियाँ प्रकाश देती हैं और सूक्ष्म किरणें बिना गर्मी या ठंड के प्रभाव देती हैं।

वितल सूर्य चंद्रप्रकाशतापमान
लोक

सुतल लोक में अंधेरा क्यों नहीं होता?

सुतल लोक में नागों के फणों की दिव्य मणियों से प्रकाश होता है, इसलिए वहाँ अंधेरा नहीं रहता।

सुतल अंधेरानाग मणिप्रकाश
लोक

तलातल में अंधकार क्यों नहीं रहता?

तलातल में नागों की दिव्य मणियों का प्रकाश अंधकार को नष्ट कर देता है।

तलातलअंधकारनाग मणि
लोक

क्या जनलोक में सूर्य और चंद्रमा की जरूरत होती है?

नहीं, जनलोक आत्मिक तेज और परब्रह्म की ज्योति से प्रकाशित होता है।

जनलोकसूर्यचंद्रमा
लोक

जनलोक में प्रकाश कैसे होता है?

जनलोक महान योगियों, ऋषियों और कुमारों के आत्मिक तेज तथा परब्रह्म की ज्योति से प्रकाशित रहता है।

जनलोकप्रकाशआत्मिक तेज
लोक

जनलोक में अंधकार होता है क्या?

नहीं, जनलोक आत्मिक तेज और परब्रह्म की ज्योति से प्रकाशित रहता है।

जनलोकअंधकारप्रकाश
लोक

जनलोक को तेजोमय लोक क्यों कहा गया है?

जनलोक योगियों, ऋषियों और कुमारों के आत्मिक तेज तथा परब्रह्म की ज्योति से प्रकाशित रहता है।

जनलोकतेजोमयआत्मिक तेज

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